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औषधीय गुणों से भरपूर पपीते की खेती से किसान उठाएं लाभ 

पटना। सूबे में पपीते की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार किसानों को अनुदान देगी। बिहार में मुख्य रूप से वैशाली, भागलपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय एवं मुंगेर जिलों में पपीते की खेती व्यावसायिक स्तर पर होती है। इसमें औषधीय गुण, विटामिन ए, विटामिन ई एवं खनिज लवण प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। साथ ही कच्चे फल से पेठा, बर्फी, खीर, रायता एवं पके फल से जैम, जेली, नेक्टर एवं कैंडी तैयार किए जाते हैं। पपीता में एक विशिष्ट प्रकार का एंजाइम (पपेन) होता है, जो औषधीय रूप से काफी महत्वपूर्ण है। यह पेट के लिए काफी लाभकारी है। इन कारणों से पपीते की खेती आमदनी बढ़ाने में सहायक है। 
पपीते की सफल बागवानी के लिए गहरी और उपजाऊ, सामान्य पी.एच. मान वाली बलुई दोमट मिट्टी अधिक उपयुक्त है। पपीते के मुख्य अनुशंसित प्रभेदों में पूसा डेलिसियस पूसा मनेस्टी, पूसा ड्वार्फ, पूसा ज्वाॅयंट, पूसा नन्हा, रांची ड्वार्फ व रेड लेडी प्रमुख हैं। इन किस्मों में रेड लेडी से खेती करना फायदेमंद है। रेड लेडी में अन्य किस्मों की अपेक्षा ज्यादा उत्पादन होता है। 
कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2017-18 में 375 हेक्टेयर (इकाई लागत 60,000 रुपये प्रति हेक्टेयर) का लक्ष्य निर्धारित है। पपीता की सघन खेती पर लागत मूल्य का 50 प्रतिशत यानी अधिकतम 30,000 रुपये प्रति हेक्टेयर सहायतानुदान दो किस्तों में 75: 25 के अनुपात में दिया जाएगा। पपीते की खेती के लिए इच्छुक किसान अपने जिले के सहायक निदेशक उद्यान के कार्यालय से संपर्क कर योजना का लाभ ले सकते हैं।


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