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बिहार पहला राज्य , जहां महिलाओं को 35 फीसदी आरक्षण 

पटना । राष्ट्रीय महिला आयोग व बिहार पुलिस के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम बिहार वेटनरी काॅलेज के सभागार में 9 फरवरी से शुरू हुआ। उद्घाटन सत्र में उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बिहार देश का पहला राज्य है, जहां सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 35 फीसदी आरक्षण मिल रहा है। थारू जनजाति के लिए ‘ बिहार स्वाभिमान पुलिस ’ के नाम से दो बटालियन का गठन किया गया है। एनडीए सरकार के दौरान 2011 में सूबे के 40 पुलिस जिलों में महिला थाने खोले गये। 
मोदी ने कहा कि पुरुषवादी मानसिकता से पुलिस अधिकारियों को भी बाहर निकलने की जरूरत है। आज महिलाओं में जागृति आई है, अब वह मुकाबला कर रही हैं। घरेलू हिंसा की घटनाएं पहले भी होती थीं, लेकिन अब वह प्रतिवेदित हो रही हैं। उन्होंने अपील की कि पुलिस महिलाओं से जुड़े मामले में बेहतर अनुसंधान करे ताकि अपराधियों को सजा मिल सके। 
राज्य के 700 थानों में महिलाओं के लिए शौचालय व स्नानागार का निर्माण कराया गया है। सोशल क्राइम पर नियंत्रण के लिए हर जिले में एक डीएसपी की तैनाती प्रक्रियाधीन है। महिलाओं को पंचायत चुनाव में 50 फीसदी आरक्षण दिया गया। 
उन्होंने कहा कि प्रति एक लाख पर दुष्कर्म की घटनाओं का राष्ट्रीय औसत 6.3 जबकि बिहार में मात्र 2 है। छेड़खानी के मामलों में प्रति लाख पर राष्ट्रीय औसत 13.2 जबकि बिहार का 0.6 है, लेकिन दहेज से मृत्यु का राष्ट्रीय औसत जहां 1.2, वहीं बिहार का 2 है, जो चिंता की बात है । 2015 में दुष्कर्म से जुड़े 91 मामलों में सजा दी गई, वहीं 2017 में संख्या बढ़ कर 168 हो गई। दहेज हत्या के मामले में 2015 में 110 तथा 2017 में 170 लोगों को सजा दी गई है। 

इस मौके पर राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य सुषमा साहू, महिला थानाध्यक्ष,  डीजी केएस द्विवेदी, गुप्तेश्वर पाण्डेय, एडीजी विनय कुमार, आलोक राज, जेएस गंगवार, समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव अतुल प्रसाद व निदेशक सुनील कुमार  समेत अनुसंधान पदाधिकारी मौजूद थे।


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