बिहार कृषि विश्वविद्यालय( BAU) सबौर ने कृषि जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। बीएयू के A Growth Media Composition for Rapid in vitro Direct Organogenesis of Saffron नवाचार को केंद्र सरकार से 9 जनवरी को पेटेंट मिला है।

कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि बिहार की जलवायु में केसर (saffron) की खेती चुनौतीपूर्ण है, लेकिन नियंत्रित तापमान, नमी एवं संरक्षित वातावरण में इसकी खेती संभव है। इन-विट्रो तकनीक से प्राप्त स्वस्थ रोपण सामग्री का उपयोग पॉलीहाउस, नेट हाउस एवं आधुनिक उद्यानिकी प्रणालियों में हो सकता है। इससे प्रगतिशील किसान, किसान उत्पादक संगठन, उद्यमी और स्टार्टअप केसर उत्पादन में आगे बढ़ सकेंगे।

कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने बीएयू के कुलपति एवं वैज्ञानिकों को इस उपलब्धि पर बधाई दी है। उन्होंने कहा कि केसर काफी महंगा है। इसकी खेती अब तक सीमित भौगोलिक क्षेत्रों तक रही है। जैव प्रौद्योगिकी आधारित तकनीक के माध्यम से अब केसर की खेती गैरपारंपरिक क्षेत्रों में भी होगी।
बीएयू से विकसित पेटेंटेड ग्रोथ मीडिया कंपोजीशन केसर के तीव्र, प्रत्यक्ष एवं नियंत्रित इन-विट्रो प्रवर्धन को संभव बनाती है। इससे कम समय में गुणवत्तापूर्ण और रोगमुक्त पौधे तैयार हो सकते हैं। कृषि मंत्री का कहना है कि इन विट्रो तकनीक केसर के बीज कंद की कमी को दूर करेगी। इससे उत्पादन लागत में कमी आएगी।