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एनआईटी पटना के हिमांशु जैन ने प्लेटलेट्स दानकर दोस्त की बचाई जान

पटना के एनआईटी में पढ़ाई कर रहे हिमांशु जैन सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एसडीपी) का दान कर अपने दोस्त की जान बचाने में कामयाब रहे। हिमांशु नोएडा के रहने वाले हैं। उनके दोस्त भी एनआईटी के ही छात्र हैं। 

बीमार दोस्त को प्लेटलेट्स की जरूरत थी। ब्लड ग्रुप समान होने के कारण हिमांशु ने एसडीपी करने का निर्णय लिया। आवश्यक जांच के बाद डॉक्टर ने उन्हें सहमति दी। 

कंप्यूटर साइंस के छात्र हिमांशु जैन का कहना है कि मां ब्लड सेंटर के सहयोग से मैंने अपने दोस्त की मदद की। एसडीपी के बाद थोड़ी कमजोरी महसूस हुई, लेकिन अब अच्छा महसूस कर रहा हूं। 

मां ब्लड सेंटर के मुकेश हिसारिया ने बताया कि सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एसडीपी) से गंभीर मरीज की जान बच जाती है। इससे मरीज के शरीर में तुरंत प्लेटलेट्स काउंट लगभग 50,000 बढ़ जाता है।

एसडीपी के लिए सभी डोनर उपयुक्त नहीं होते हैं। जिस डोनर का चयन होता है, उसे मशीन पर कुछ घंटे धैर्य से बैठकर इस प्रक्रिया को कराना होता है। मशीन एक तरफ से ब्लड लेती है। फिर उस ब्लड से प्लेटलेट्स अलग कर वापस ब्लड डोनर के शरीर में पहुंचा देती है। 

23 नवंबर 2024 को मां ब्लड सेंटर का 1000 दिन पूरा हो जाएगा। अब तक यहां 58 लोगों ने एसडीपी किया है। 1000 दिन पूरे होने पर 24 नवंबर को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इस कार्यक्रम के जरिये मशहूर लोकगायिका शारदा सिन्हा को श्रद्धांजलि दी जाएगी।   
 
 


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