सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की जगह बैलेट पेपर से मतदान कराने से जुड़ी जनहित याचिका खारिज कर दी। जस्टिस विक्रम नाथ और पीबी वराले की खंडपीठ ने कहा कि जब कोई चुनाव जीतता है तब ईवीएम में छेड़छाड़ का आरोप नहीं लगता है, लेकिन हारने पर आरोप लगते हैं।
प्रचारक और राजनीतिज्ञ डॉ के. ए. पॉल ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी। इसमें ईवीएम के स्थान पर बैलेट से मतदान करने की मांग की गई थी। याचिका में यह भी प्रार्थना की गई थी कि चुनाव आयोग उन उम्मीदवारों को कम से कम पांच साल के लिए अयोग्य घोषित करे, जो चुनाव के दौरान पैसे, शराब या अन्य प्रलोभन देते हुए पाए जाएं।
जस्टिस विक्रम नाथ और पीबी वराले की खंडपीठ के समक्ष याचिकाकर्ता ने अपनी दलील शुरू करते हुए कहा कि यह याचिका मैंने बहुत प्रार्थना के बाद दायर की है।
इस पर जस्टिस नाथ ने कहा कि आपको ऐसे अद्भुत विचार कैसे आते हैं। याचिकाकर्ता ने बताया कि वह अभी लॉस एंजेल्स में हुए ग्लोबल पीस समिट से लौटे हैं। उनकी याचिका को 180 सेवानिवृत्त आईएएस, आईपीएस और न्यायाधीशों का समर्थन प्राप्त है।
डॉ पॉल ने अपनी याचिका में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में छेड़छाड़ का भी आरोप लगाया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेषज्ञों के प्रमाण का भी हवाला दिया।