बिहार में बैंकों के प्रदर्शन में सुधार के लिए राज्य सरकार ने रैंकिंग इंडेक्स की मंजूरी दी है। यह इंडेक्स वार्षिक साख योजना के लक्ष्य की प्राप्ति, ऋण-जमा अनुपात (सीडी रेशियो) में वृद्धि, कृषि, पशुपालन एवं मत्स्य क्षेत्रों में ऋण वितरण, स्वयं सहायता समूहों को ऋण, मुद्रा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड एवं पीएमईजीपी में भागीदारी को आधार बनाकर तैयार किया गया है।
बिहार का सीडी रेशियो लगभग 59 प्रतिशत है जबकि राष्ट्रीय औसत 78 प्रतिशत है।
डिप्टी सीएम सह वित्त मंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में अधिकतर बैंक लक्ष्य हासिल करने में विफल रहे हैं। राज्य का सीडी रेशियो वर्तमान में राष्ट्रीय औसत से काफी कम है।
बैंकों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उनके प्रदर्शन के आधार पर रैंकिंग-स्कोरिंग इंडेक्स लागू करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है। यह बैंकों के लिए अलार्मिंग की तरह है। इस इंडेक्स में न्यूनतम 40 अंक पाने वाले बैंकों को ही राज्य सरकार की योजनाओं में शामिल किया जाएगा। उन्हें ही सरकारी जमा स्वीकार करने, सार्वजनिक उपक्रम, प्राधिकरण एवं सोसाइटी से बैंकिंग लेन-देन की अनुमति मिलेगी।

डिप्टी सीएम ने कहा कि राज्य के आर्थिक विकास में बैंकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। बैंक का काम केवल बचत को सुरक्षित रखने तक सीमित नहीं हैं। बैंक राज्य की आर्थिक गति को भी बल प्रदान करते हैं। कृषि, उद्योग, व्यापार, सेवा, शिक्षा समेत अन्य क्षेत्रों में ऋण उपलब्ध कराकर बैंक रोजगार सृजन में भी सहायता देते हैं।
बैंकों की इसी महत्त्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) के माध्यम से वार्षिक साख योजना के तहत बैंकों के लिए साख प्राप्ति का लक्ष्य तय कर दिया जाता है।