नई दिल्ली। कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि सार्वजनिक बैंकों ने पिछले वित्त वर्ष में एनपीए कम करके दिखाया है। कैग के मुताबिक इससे बैंक मुनाफा बढ़ाकर या नुकसान घटाकर दिखाने में कामयाब रहे। संसद में पेश रिपोर्ट में कहा गया कि ऐसे उदाहरण सामने आए हैं कि बैंकों ने जो एनपीए दिखाया है और आरबीआई ने जो एनपीए पाया है उनमें काफी अंतर है। कैग ने 17 सरकारी बैंकों का आॅडिट किया है जिनमें 12 बैंकों के रिपोर्ट पेश किए गए । शेष पांच बैंकों के बारे में कहा गया कि उनके लेखा में खामियां थीं, लेकिन उनका अनुपात कम होने के कारण आरबीआई के नियमों के अनुसार उन्हें वार्षिक रिपोर्ट बताने से छूट मिल गई।