पटना । उत्तर बिहार और सीमांचल में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य में बाढ़ से मृतकों की संख्या 119 हो गई है। 98.30 लाख की आबादी बाढ़ की चपेट में है। सबसे ज्यादा 23 मौत अररिया जिले में हुई है। बाढ़ से बिहार के 21 जिले प्रभावित हैं, लेकिन सर्वाधिक तबाही 15 जिलों में है। किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, शिवहर, सहरसा, सुपौल, खगड़िया एवं मधेपुरा जिले बाढ़ से अधिक प्रभावित हैं। गोपालगंज व कटिहार जिलों में बुधवार को बांध टूट जाने से सैकड़ों गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। कई नदियां उफान पर हैं। पटना में भी गंगा का जल स्तर काफी बढ़ गया है। जिसके बाद बाढ़ का अलर्ट जारी कर दिया गया है। गांधी घाट में गंगा खतरे के निशान के करीब आ गई है। बाढ़ के कारण राज्य में रेल और सड़क यातायात बाधित है। रेल ट्रेक धंसने से सहरसा-पूर्णिया और कटिहार-मालदा रेलखंड पर परिचालन बंद कर दिया गया है। एनएच 107, 31, 104, 105 व 28 पर वाहनों का आवागमन बंद है। कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अब तक 4.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की फसल बर्बाद हो गयी है।
राहत व बचाव कार्य में प्रशासनिक तं़त्र लगा हुआ है, लेकिन तबाही इतनी भयावह है कि प्रशासनिक व्यवस्था कम पड़ जा रही है। कई गांव टापू में तब्दील हो गए हैं। सेना, एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की टीम राहत कार्य में जुटी हुई है। हैलिकाॅप्टर से खाने के पैकेट, पानी व अन्य जरूरी सामान गिराए जा रहे हैं। राहत सामग्री लेने के लिए लोगों में लूट मची हुई है। इस कारण भी कई जगहों पर स्थिति गंभीर बनी हुई है। किशनगंज में पीड़ितों ने सांसद असरारुल हक काशमी को बंधक बना लिया। सीएम व डिप्टी सीएम ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया तथा अधिकारियों को राहत व बचाव कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया। जिलों के प्रभारी मंत्री व प्रधान सचिव भी अपने क्षेत्रों में कैंप किए हुए हैं।