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आपदा पीड़ितों का सरकारी खजाने पर पहला हक

 पटना । बिहार में आयी भीषण बाढ़ पर चिंता जताते हुए सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि हमने ऐसा दृश्य कभी नहीं देखा। सूबे के 17 जिलों की करीब एक करोड़ आठ लाख की आबादी प्रभावित है। 153 लोगों की मौत हो चुकी है। अररिया व किशनगंज जिलों की स्थिति गंभीर है। आपदा की घड़ी में सरकार राहत व बचाव के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार के खजाने पर पहला हक आपदा पीड़ितों का है। जदयू के खुला अधिवेशन में आए सभी लोगों से बाढ़ पीड़ितों की पूरी मदद करने का आग्रह किया।
भागलपुर सृजन घोटाला की चर्चा करते हुए नीतीश ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए ही सीबीआई से जांच कराने की अनुशंसा की। आठ अगस्त को सूचना मिलते ही मैंने मीडिया को इसकी जानकारी दी। यदि चेक बाउंस नहीं होता, तो मामला दबा ही रह जाता। लोगों में गलत तरीके से पैसे कमाने की होड़ लगी हुई है। सरकारी धन का निजी स्वार्थ में इस्तेमाल हो रहा है। मैं बार-बार कहता हूं कि कफन में जेब नहीं होती है। अकेले ही ऊपर जाना है। 
जनादेश की बात करने वालों पर टिप्पणी करते हुए नीतीश ने कहा कि हम जानना चाहते हैं कि किस लिए जनादेश मिला था। जनादेश बिहार के विकास के लिए मिला था या परिवार की खुशहाली के लिए। राज्यसभा के दो सांसदों को छोड़ पार्टी के सभी जनप्रतिनिधि हमारे साथ हैं। शरद यादव जी पार्टी के वरिष्ठ नेता है। वह अपना निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं। 
नीतीश कुमार ने अपनी बात रखते हुए कहा कि हम वोट के लिए नहीं बल्कि जनता के लिए काम करते हैं। हम समाजवादी विचार के हैं। मैं जनता को मालिक की तरह देखता हूं। कभी घमंड नहीं किया। हम आज भी बिहार के मुख्यमंत्री हैं। यह किसी की कृपा पर नहीं बल्कि बिहार की जनता की बदौलत है। 


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