नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राइट टू प्राइवेसी पर ऐतिहासिक फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है। यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आता है। निजता का हनन कानून गलत है। 26 अगस्त को रिटायर हो रहे चीफ जस्टिस जे.एस. खेहर की अध्यक्षता वाली नौ जजों की पीठ ने विस्तृत सुनवाई के बाद गुरुवार को यह फैसला दिया। फैसले को दो अगस्त को सुरक्षित रख लिया गया था।
आधार की अनिवार्यता के खिलाफ याचिकाएं थीं कि आधार से व्यक्ति की निजता का उल्लंघन हो रहा है। इसमें दिया गया बायोमीट्रिक डाटा लीक हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट के दो पूर्व फैसलों में आठ और छह जजों की पीठ कह चुकी है कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है। ऐसे में भारत सरकार और याचिकाकर्ताओं ने निजता के अधिकार का मुद्दा बड़ी पीठ से सुने जाने की अपील की थी। इस पर नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ गठित हुई। पीठ के अध्यक्ष प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहर हैं। साथ ही पीठ में जस्टिस जे. चेलमेश्वर, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस आरके अग्रवाल, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एसके कौल, जस्टिस एएम सप्रे व जस्टिस अब्दुल नजीर शामिल हैं।