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निबंधन विभाग का राजस्व पिछले वर्ष से बढ़ा

पटना । शराबबंदी से जहां उत्पाद विभाग का राजस्व शून्य है, वहीं निबंधन विभाग के राजस्व में गत वर्ष की तुलना में इजाफा हुआ है। चालू वित्त वर्ष (2017-18) की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून तक का राजस्व संग्रह 924.67 करोड़ है जो 2016-17 की पहली तिमाही के राजस्व संग्रह से 2.52 प्रतिशत अधिक है। गत वर्ष इस दौरान 901.92 करोड़ राजस्व मिला था। हालांकि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही की उपलब्धि लक्ष्य से कम है। पहली तिमाही का लक्ष्य 1050 करोड़ था जबकि वसूली 924.67 करोड़ है। निबंधन विभाग ने 2017-18 के लिए लक्ष्य 4600 करोड़ रुपये रखा है।  
राजस्व संग्रह बढ़ाने के लिए विभाग ने कई कदम उठाए हैं। सभी निबंधन कार्यालयों में लोगों की सुविधा के लिए ई स्टांपिंग की व्यवस्था की गई है। यह काम स्टाॅक होल्डिंग काॅरपोरेशन आॅफ इंडिया को दिया गया है। विभिन्न दस्तावेजों के रजिस्ट्रेशन के लिए आॅन लाइन व्यवस्था की गई है। आॅन लाइन पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए स्टांप शुल्क में एक प्रतिशत या अधिकतम 2000 रुपये की छूट भी दी गई है। एजुकेशन एवं मेडिकल लोन के लिए निबंधन शुल्क व स्टांप शुल्क में काफी कमी की गई है। वर्तमान में निबंधन व स्टांप शुल्क मात्र 0.5 प्रतिशत है। महिला सशक्तीकरण के तहत महिलाओं के पक्ष में दस्तावेजों के निबंधन पर पांच फीसदी की छूट दी गई है।
  साथ ही बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत बैंकों से ऋण के लिए स्टांप शुल्क एक हजार से घटाकर एक सौ रुपये कर दिया गया है। स्टांप की फर्जी बिक्री पर रोक के लिए कोर्ट में फ्रैंंिकंग मशीन से स्टांप की व्यवस्था की जा रही है।             


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