नई दिल्ली। आईआईटी गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने ऐसी सृजनात्मक सोच पर काम किया है, जो अल्जाइमर रोग से जुड़ी भूलने की आदत को रोकने या कम करने में मदद कर सकते हैं। अनुसंधान दल का नेतृत्व प्रो. वाइबिन रामकृष्णन एव प्रो. हर्षल नेमाड़े ने किया। उन्होंने अल्जाइमर के न्यूरोकेमिकल सिद्धांत का अध्ययन कर मस्तिष्क में न्यूरोटॉक्सिक अणुओं का संचय रोकने के नये तरीकों की खोज की। ये अणु भूलने की आदत से जुड़े हैं।
अल्जाइमर रोग का इलाज भारत में विकसित करने की जरूरत है। विश्व में चीन और अमेरिका के बाद अल्जाइमर रोगियों की तीसरी सबसे बड़ी संख्या भारत में है। भारत में 40 लाख से अधिक लोग अल्जाइमर से जुड़ी भूलने की आदत के शिकार हैं। वर्तमान उपचार में केवल रोग के कुछ लक्षण कम हो जाते हैं, लेकिन अल्जाइमर के कारणों का इलाज नहीं हो पाता है।
आईआईटी, गुवाहाटी के वैज्ञानिकों ने पाया कि अल्जाइमर की एक वजह मस्तिष्क में एमीलॉइड बीटा पेप्टाइड्स का संचय है। कम वोल्टेज एवं सुरक्षित विद्युत क्षेत्र के प्रयोग से विषाक्त न्यूरोडीजेनेरेटिव अणुओं का निर्माण और संचय कम हो सकता है।
साथ ही बाहरी विद्युत या चुंबकीय क्षेत्र इन पेप्टाइड अणुओं की संरचना को व्यवस्थित करता है, जिससे उनके एकत्रीकरण को रोका जा सकता है। वैज्ञानिकों ने न्यूरोटॉक्सिन अणुओं के एकत्रीकरण को रोकने के लिए ‘ट्रोजन पेप्टाइड्स ’का उपयोग करने की संभावना का भी पता लगाया है।