पटना। बिहार विद्युत विनियामक आयोग से टैरिफ ऑर्डर 2020-21 में संशोधन की मांग बिहार चैंबर ऑफ काॅमर्स और बिहार उद्योग संघ ने की है। व्यावसायिक संघों ने कहा है कि अनुबंध मांग के प्रावधान की वजह से उपभोक्ताओं को काफी परेशानी हो रही है। पुराने टैरिफ में अनुबंध मांग पर दस प्रतिशत तक अधिक बिजली खपत पर फाइन नहीं था, जिसे अब घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया है।
चैंबर अध्यक्ष पीके अग्रवाल ने बताया कि यदि किसी उपभोक्ता की अनुबंध मांग 100 केवीए है। किसी माह में खपत 125 केवीए हो जाता है, तो 25 केवीए पर डिमांड चार्ज और सामान्य खपत पर भी उसी अनुपात में फाइन सामान्य दर से दोगुना लग रहा है। टैरिफ में रखी गई इस शर्त के कारण उपभोक्ताओं को बिजली बिल भुगतान में परेशानी हो रही है।
बीआईए के अध्यक्ष राम लाल खेतान का कहना है कि नये टैरिफ से कारोबारियों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। नये टैरिफ में प्रावधान है कि यदि उपभोक्ता अपनी अनुबंधित बिजली मांग का पांच प्रतिशत से अधिक खपत करता है, तो उस अधिक खपत की गई बिजली पर सामान्य शुल्क के साथ उतना ही डिमांड शुल्क लिया जायेगा।