नई दिल्ली। सरकार ने मुखौटा (शेल) कंपनियों की पहचान और इन्हें बंद करने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया है। लगातार दो साल या इससे अधिक समय से वित्तीय विवरण (एफएस) के दाखिल नहीं करने के आधार पर कंपनियों की पहचान की जा रही है। केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने संसद में बताया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान देश में 3,82,581 कंपनियों को बंद किया गया है।
कंपनी अधिनियम के तहत शेल कंपनी को पारिभाषित नहीं किया गया है। यह आम तौर पर उस कंपनी को इंगित करता है जो सक्रिय कारोबार का संचालन नहीं करती हैं। कंपनी के पास महत्वपूर्ण परिसंपत्ति नहीं है और इनका इस्तेमाल कुछ मामलों जैसे कर चोरी, मनी लांड्रिंग, अस्पष्ट स्वामित्व एवं बेनामी संपत्ति में किया जाता है। शेल कंपनियों की जांच के लिए गठित विशेष कार्य बल ने कुछ सिफारिश की है।