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ग्राउंड वाटर अथाॅरिटी बनाने का अनुरोध 

पटना। बिहार के लिए भूजल प्राधिकरण (ग्राउंड वाटर अथाॅरिटी) बनाने का अनुरोध बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने राज्य सरकार से किया है। भारत सरकार के सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड ने भूजल निकासी के संबंध में जो मापदंड राज्य में लागू किया है उससे राज्य के छोटे उद्यमियों को परेशानी हो रही है । 

चैंबर अध्यक्ष पी.के. अग्रवाल ने बताया कि भारत सरकार के निर्देशानुसार अब तक देश के 13 राज्य एवं 2 केंद्रशासित प्रदेशों ने इस कानून के अंतर्गत भूजल अथाॅरिटी बना लिया है। बिहार में 2006 में बिहार ग्राउंड वाटर (रेगूलेशन एंड कंट्रोल ऑफ डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट) एक्ट बनने के बावजूद अब तक भूजल अथाॅरिटी नहीं बन पाया है । 

राज्य की अपनी भूजल अथाॅरिटी नहीं होने के कारण बिहार के उद्यमियों को भारत सरकार के सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के नियमों का पालन करना पड़ता है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के नियम अधिकतर भूजल की कमी वाले राज्यों को ध्यान में रख कर बनाए जाते हैं। इस कारण राज्य के उद्यमियों को परेशानी हो रही है । 

बिहार में पर्याप्त जल होने के बावजूद सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के नियम के अनुसार सूक्ष्म एवं लघु उद्योग को 10केएलडी तक ही जल उपयोग करने से छूट दी गई है। यदि कोई उद्योग उससे अधिक भूजल का उपयोग करेगा, तो उसके लिए दंड का प्रावधान किया गया है। चैंबर ने इस सबंध में मुख्यमंत्री, डिप्टी सीएम, लघु जल संसाधन मंत्री, मुख्य सचिव, उद्योग, जल संसाधन एवं लघु जल संसाधन विभाग को पत्र लिखा है। 
 


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