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बजट में एनपीए निवारण की ठोस योजना नहीं : एआईबीओए

पटना। ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (एआईबीओए) के वरीय उपाध्यक्ष डॉ कुमार अरबिंद ने कहा कि बैंकों की मूल समस्या एनपीए है। इसके कम करने की कोई ठोस योजना बजट में नहीं है। एनपीए के वर्तमान वितीय वर्ष में 8.3 से बढ़कर 13.5 प्रतिशत होने का अनुमान है। एसेट मैनेजमेंट कंपनी इसका समाधान नहीं है। 20,000 करोड़ की पूंजी नाकाफी है। 

उन्होंने कहा कि कुछ बैंकों के विनिवेश,आईडीबीआई बैंक के निजीकरण एवं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या घटाने की योजना देश की आर्थिक संरचना को कमजोर करनेवाला है। बीमा क्षेत्र में एफडीआई की हिस्सेदारी 39 से बढ़कर 74 प्रतिशत करने एवं एलआईसी के आईपीओ लाने का इरादा देश के सबसे मजबूत क्षेत्र की अस्मिता पर प्रहार है।

डीजल एवं पेट्रोल की कीमत में वृद्धि, वितीय एवं राजस्व घाटा महंगाई बढ़ाने वाला होगा। डिजिटल इंडिया के परिपेक्ष्य में मोबाइल फोन एवं चार्जर की कीमतों में वृद्धि समझ से परे है। कपास उद्योग के कर संरचना में परिवर्तन से कपड़े की कीमत बढ़ेगी। सर्वाधिक प्रभावित मध्यम वर्ग, श्रमिक एवं बेरोजगारों की सुविधा का कोई स्पष्ट प्रावधान बजट में नहीं है। 
 


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