पटना। नई दिल्ली में वामपंथी उग्रवाद पर आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शामिल हुए। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि नक्सली हिंसा का समाप्त होना प्रजातंत्र की मजबूती एवं विकास के लिए जरूरी है। केंद्र एवं प्रभावित राज्यों की बैठक नियमित रूप से हर वर्ष होनी चाहिए।
बीते वर्षों में घटित नक्सली हिंसा ने प्रमाणित किया है कि इस संगठन का उद्देश्य गरीबों का हित करना नहीं है। बल्कि अलोकतांत्रिक और हिंसात्मक तरीकों का प्रयोग कर गरीबों को विकास की मुख्यधारा से वंचित रखना है।
उन्होंने कहा कि राज्य में सुरक्षा संबंधी व्यय योजना से आच्छादित जिलों की संख्या 22 से घटकर केवल 10 (रोहतास, कैमूर, गया, औरंगाबाद, नवादा, जमुई, लखीसराय, मुंगेर, बांका एवं बेतिया) रह गई है। अति उग्रवाद प्रभावित जिलों की संख्या छह से घटकर केवल तीन (गया, जमुई, लखीसराय) रह गई है। अति उग्रवाद प्रभावित जिलों की सूची में औरंगाबाद को पुनः शामिल करने पर सीएम ने जोर दिया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में बैठक हुई। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, अर्जुन मुंडा, अश्विनी वैष्णव, जनरल वीके सिंह एवं नित्यानंद राय भी उपस्थित थे। बैठक में ओडिशा, महाराष्ट्र, तेलंगाना, मध्यप्रदेश और झारखंड के मुख्यमंत्री, आंध्र प्रदेश के गृह मंत्री, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और केरल के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।