नई दिल्ली। रेस्टोरेंट संचालक उपभोक्ताओं से जबरन सेवा शुल्क वसूल रहे हैं। उपभोक्ताओं को ऐसे शुल्क के बारे में गलत तरीके से गुमराह किया जा रहा है। बिल से इस तरह के शुल्क को हटाने का अनुरोध करने पर रेस्टोरेंट ग्राहकों को परेशान कर रहे हैं। उपभोक्ता मामलों के विभाग का कहना है कि यह प्रभार स्वैच्छिक है। इसे देना या नहीं देना उपभोक्ताओं के विवेक पर निर्भर करता है। यह कानून के अनुसार आवश्यक नहीं है।
विभाग के सचिव रोहित कुमार सिंह ने नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष को लिखे पत्र में इसकी चर्चा की है। पत्र में कहा गया है कि यह मुद्दा उपभोक्ताओं के अधिकारों पर काफी प्रभाव डालता है।
उपभोक्ता विभाग इस मसले को लेकर दो जून को नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के साथ एक बैठक करने जा रहा है। यह बैठक मीडिया रिपोर्ट एवं राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों को देखते हुए की जा रही है।