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फर्जी कॉल मामले में डीजीपी की भूमिका संदिग्ध : मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि आरोपित आईपीएस आदित्य कुमार के मामले में फर्जी कॉल के आधार पर फैसले करने वाले डीजीपी एसके सिंघल की भूमिका संदेह के घेरे में है। इस मामले की जांच सीबीआई या किसी अन्य सक्षम एजेंसी से करानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जब एसपी स्तर के अधिकारी को बचाने और लाभ पहुंचाने का संदेह डीजीपी पर है, तो उनके नीचे काम करने वाली आर्थिक अपराध इकाई ( ईओयू) निष्पक्ष जांच कैसे कर सकती है।

गया में शराब बरामद होने से लेकर वहां के तत्कालीन एसपी आदित्य कुमार के ट्रांसफर और एफआईआर से दोषमुक्त करने तक पूरे मामले में डीजीपी एसके सिंघल की भूमिका संदिग्ध है।

डीजीपी सिंघल पिछले अगस्त महीने से उस व्यक्ति से दर्जनों बार बात कर रहे थे, उसकी पैरवी को गंभीरता से ले रहे थे, जो स्वयं को हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बता रहा था, लेकिन उन्होंने फोन करने वाले की सत्यता जांचने की कोशिश नहीं की।

आरोपित एसपी को दोषमुक्त करने के लिए जांच अधिकारी को छुट्टी के दौरान चेन्नई से बुलाकर क्लोजर रिपोर्ट क्यों बनवाई गई ? गया से ट्रांसफर के बाद एसपी को डीजीपी कार्यालय में एआइजी  (क्यू) क्यों बना दिया गया ? डीजीपी ने एसपी के विरुद्ध विभागीय जांच बंद करने और पूर्णिया में पोस्टिंग के लिए संचिका क्यों बढ़ाई ?

सुशील कुमार मोदी ने कहा कि ऐसे गंभीर सवालों का जवाब सीबीआई ही ढूंढ सकती है।

 


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