पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि महागठबंधन सरकार का पहला बजट केंद्र पर आश्रित बजट है। एक लाख करोड़ के योजना व्यय में इस साल कोई वृद्धि नहीं की गई। इस कारण ग्रामीण विकास, समाज कल्याण और कृषि जैसे महत्वपूर्ण विभागों के बजट में भी कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई।
शिक्षा विभाग के बजट में मात्र दो करोड़ की वृद्धि ऊंट के मुंह में जीरा समान है। बिहार के 2023-24 के पूरे बजट की 60 फीसदी राशि केंद्रीय सहायता से प्राप्त होगी। इसके लिए राज्य सरकार को केंद्र सरकार को धन्यवाद देना चाहिए।
मोदी ने कहा कि पूंजीगत परिव्यय यानी निर्माण कार्यों पर खर्च में पिछले साल की अपेक्षा 492.33 करोड़ की कमी चिंता का विषय है। इससे बेरोजगारी बढ़ेगी।
बजट में पूंजीगत परिव्यय के लिए 29257 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह राशि वर्ष 2021-22 की तुलना में 1546 करोड़ रुपये कम है।
बिहार को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के रूप में 1,02,737 करोड़ राशि मिलेगी। यह पिछले साल की तुलना में 11,556 करोड़ रुपये अधिक है। केंद्रीय अनुदान के तौर पर राज्य को 53,337 करोड़ करोड़ रुपये मिलेंगे। मोदी ने कहा कि यह बजट अपने संसाधन बढ़ाने में राज्य सरकार की वित्तीय विफलता का निराशाजनक दस्तावेज है।