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महिलाओं के विशेष अवकाश को बंद करना दुर्भाग्यपूर्ण

पटना। राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बिहार में संविदा पर डेढ़ लाख महिला कर्मचारी और साठ हजार से अधिक आशा कार्यकर्ता कार्यरत हैं। उन्हें हर माह दो दिनों का विशेष अवकाश मिलता था, जिसे राज्य सरकार ने बंद कर दिया है। यह निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण है। इसे तुरंत वापस लेना चाहिए।

बिहार देश का पहला राज्य है, जहां महिला कर्मचारियों की पीड़ा को ध्यान में रख कर हर महीने दो दिनों के विशेष अवकाश देने की व्यवस्था की गई थी। मोदी ने कहा कि लालू-राबड़ी सरकार की इस नेक पहल को एनडीए सरकार ने भी जारी रखा, जबकि महागठबंधन की सरकार बनने के सात माह बाद ही संविदा पर कार्यरत महिला कर्मचारियों को विशेष अवकाश की राहत से वंचित किया जा रहा है।

सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश में कहा गया है कि विशेष अवकाश की सुविधा केवल स्थायी महिला कर्मचारियों तक ही सीमित रहेगी। मोदी ने कहा कि माहवारी के दिनों की परेशानी जब हर महिला समान रूप से झेलती हैं, तब महिलाओं में नौकरी के आधार पर भेद करना उचित नहीं है। सामान्य प्रशासन विभाग सीधे मुख्यमंत्री के अधीन है। इसलिए उन्हें अपने विभाग के महिला विरोधी आदेश को तुरंत निरस्त कराना चाहिए।

 


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