राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने कहा कि संसद में अडाणी का विरोध करने वालों में यदि हिम्मत है, तो वे बिहार में सीमेंट फैक्ट्री और स्मार्ट मीटर लगाने के लिए अडाणी ग्रुप के साथ समझौते को रद्द कराएं।
एक तरफ ये विरोधी दल केंद्र सरकार पर उद्योगपति गौतम अडाणी को लाभ पहुंचाने का अनर्गल आरोप लगाते हुए संसद ठप करते हैं। दूसरी तरफ बिहार-छत्तीसगढ सहित आधा दर्जन राज्यों में उद्योग लगाने के लिए अडाणी ग्रुप का रेड कार्पेट वेलकम करते हैं। यह दोहरापन क्यों?

मोदी ने कहा कि नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने अडानी समूह के साथ 27.99 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का समझौता किया है। उन्होंने बिहार सरकार से पूछा है कि अडाणी ग्रुप को 27.99 लाख स्मार्ट मीटर लगाने और नवादा में सीमेंट फैक्ट्री लगाने के लिए उनकी सरकार ने बियाडा के माध्यम से 70 एकड़ जमीन क्यों दी?
सुप्रीम कोर्ट की जांच समिति अडाणी ग्रुप के विरुद्ध आरोपों की जांच कर इस समूह को क्लीन चिट दे चुकी है। इसके बावजूद इस मुद्दे पर संसद का पूरा सत्र क्यों बर्बाद किया गया? इसके लिए विपक्ष को माफी मांगनी चाहिए।
