राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने बिहार सरकार से पूछा है कि दो दिवसीय इन्वेस्टर मीट में मुख्यमंत्री ने भाषण क्यों नहीं दिया? वे दो घंटे रहे, लेकिन एक शब्द नहीं कहा। निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए मुख्यमंत्री का संबोधन जरूरी था।
एसआईपीबी से जिनका प्रस्ताव पहले स्वीकृत हो चुका है। जो विस्तारीकरण में लगे हैं, उन सबको एमओयू में शामिल कर लिया गया।

मोदी ने कहा कि अडानी समूह को छोड़कर टाटा, बिरला, अंबानी, मित्तल जैसा कोई बड़ा समूह नहीं आया। बिहार के ही वेदांता समूह के अनिल अग्रवाल भी नहीं आए। बिहार के स्थानीय उद्योग संगठनों की घोर उपेक्षा की गई।
2011 और 2016 की औद्योगिक नीति के तहत निवेशकों का करीब 800 करोड़ बकाया है। इसकी वसूली के लिए निवेशकों को अवमानना का मुकदमा करना पड़ रहा है, तब भी भुगतान नहीं मिल रहा है।