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पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में गाद प्रबंधन नीति पर बनी सहमति 

पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में गाद प्रबंधन नीति (silt management policy) बनाने पर सहमति बन गई। गंगा, कोसी सहित विभिन्न नदियों के पानी एवं गाद के कारण बिहार को प्रत्येक वर्ष बाढ़ की विभीषिका का सामना करना पड़ता है। इस आपदा से निपटने में गाद प्रबंधन नीति सहायक होगी। 

रांची में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की 27वीं बैठक हुई। परिषद में बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।

बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी, बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और पश्चिम बंगाल की वित्त राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य शामिल हुए।
बिहार-झारखंड विभाजन के समय से लंबित सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम की संपत्ति और देनदारियों पर भी चर्चा हुई। 

डिप्टी सीएम सह वित्तमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि इंद्रपुरी जलाशय-वाणसागर समझौता के तहत सोन नदी के जल बंटवारे का फॉर्मूला तय हुआ। इसमें बिहार को 5.75 एमएएफ और झारखंड को 2 एमएएफ पानी मिलने पर सहमति बनी। 

उन्होंने फरक्का बराज के कारण गंगा की अविरलता को बरकरार रखने एवं बिहार-पश्चिम बंगाल सीमा में कटाव निरोधक कार्यों पर होने वाले खर्च का पूरा वहन केंद्र सरकार से करने का अनुरोध किया। इस पर गाद प्रबंधन नीति बनाने पर सहमति हुई। 

नेपाल तथा अन्य राज्यों से आने वाली नदियों के जल प्रबंधन पर नीति, सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास, राज्यों के बीच आपसी समन्वय और दीर्घकालिक समस्याओं के समाधान जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। 

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि तीन नए आपराधिक कानूनों पर पूर्ण अमल करने के लिए पूर्वी राज्यों को और अधिक प्रयास करने चाहिए। इन राज्यों में नार्काेटिक्स पर नकेल कसने की दिशा में अधिक काम करने की जरूरत है। बिहार, झारखंड और ओडिशा काफी हद तक नक्सलवाद से मुक्त हो गए हैं। 31 मार्च 2026 तक देश नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा।
 


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