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किसानों के हित में है खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों का विकास  

बिहार विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव ने कहा कि बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य के लिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों का विकास जरूरी है। इससे किसानों को उनकी उपज का अधिक मूल्य मिलेगा। राज्य में सड़क और बिजली के क्षेत्र में काफी काम हुए हैं। इन प्रयासों से उद्योग-धंधों का भी विकास हो रहा है। इथेनॉल एवं डेयरी के प्लांट लग रहे हैं। 

विधानसभा अध्यक्ष बिहार उद्योग संघ (बीआईए) परिसर में खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के विकास पर दो दिवसीय सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उत्पाद की गुणवत्ता अच्छी हो और किसानों को उपज का अधिक मूल्य मिले। इसके लिए सेमिनार में चर्चा होनी चाहिए।

बिहार में चार कृषि रोड मैप के कारण फल, अनाज, सब्जी और दूध के उत्पादन में वृद्धि हुई है। उद्यमियों के हित में नीति बनाने के दौरान बीआईए के सुझाव उपयोगी होते हैं। राज्य में निवेश को बढ़ावा देने में संघ को और प्रयास करने की जरूरत है। 

आईसीएआर कृषि यांत्रिकी प्रभाग के उप महानिदेशक डॉ एसएन झा ने विलेज इकोनॉमिक जोन की चर्चा की। उन्होंने गांवों में फूड प्रोसेसिंग केंद्र बनाने पर जोर दिया। 

एमएसएमई मंत्रालय पटना कार्यालय के संयुक्त निदेशक इंद्रजीत यादव ने बताया कि विदेशों में प्रोसेस्ड और पैक्ड फूड की मांग बढ़ गयी है। बिहार से खाद्य उत्पादों के निर्यात की असीम संभावनाएं हैं। बिहार में फल-सब्जी का काफी उत्पादन होता है। आधुनिक पैकेजिंग और ब्रांडिंग से खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों की अच्छी मार्केटिंग की जा सकती है। 

संयुक्त निदेशक ने बताया कि बिहार में 15 लाख उद्यम पोर्टल पर निबंधित हैं। केंद्रीय संस्थानों को अपनी जरूरत के 25 फीसदी उत्पादों की खरीद निबंधित एमएसएमई इकाइयों से करने का निर्देश है। उद्योगों के कॉमन इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 10 करोड़ तक की राशि का प्रावधान है। इसमें 80 फीसदी अनुदान राशि केंद्र सरकार और 10 फीसदी राज्य सरकार दे रही है। 
 
चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान के निदेशक डॉ राणा सिंह ने कहा कि बिहार में खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में वैल्यू ऐड प्रोडक्ट की जरूरत है। 

बीआईए के अध्यक्ष केपीएस केशरी ने भी अपने विचारों को रखा। दो दिवसीय सेमिनार सह प्रदर्शनी में खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी 32 यूनिट ने प्रदर्शनी लगायी है।


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