बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (बियाडा) ने एमनेस्टी पॉलिसी 2025 जारी की है। 31 दिसंबर 2025 तक पॉलिसी प्रभावी रहेगी। इस नीति का उद्देश्य औद्योगिक जमीन पर लंबित विवाद और मुकदमों को समाप्त करना और बंद पड़ी इकाइयों को पुनर्जीवित कर औद्योगीकरण की प्रक्रिया को गति देना है।
हाल के वर्षों में विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में कई यूनिट आंशिक या न्यूनतम रूप से कार्यरत पाई गईं। निरीक्षण के बाद जारी नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर जमीन का आवंटन रद्द किया गया।
इसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में प्राधिकार के समक्ष अपील और याचिकाएं पटना हाईकोर्ट में दायर की गई। उद्योग संगठन एवं निवेशकों से चर्चा के बाद विभाग को सुझाव मिला कि रद्द इकाइयों को अंतिम अवसर देने के लिए एक सशक्त एमनेस्टी पॉलिसी लानी चाहिए।

इस प्रक्रिया में पहले आवेदन देना होगा। तीन कार्य दिवस में प्रारंभिक स्वीकृति मिलेगी। सभी औपचारिकताएं पूरी करने पर सात कार्य दिवस में अंतिम स्वीकृति मिल जाएगी। जिस यूनिट की जमीन पर तीसरे पक्ष को अधिकार नहीं मिला है। उन्हें इस योजना का लाभ मिलेगा।
एमनेस्टी पॉलिसी के अंतर्गत उद्योग वर्ग के अनुसार उत्पादन शुरू करने की समयसीमा निर्धारित की गई है।
माइक्रो यूनिट : 9 माह में ट्रायल और 12 माह में वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करना होगा।
लघु यूनिट : 12 माह में ट्रायल और 18 माह में वाणिज्यिक उत्पादन आरंभ करना होगा।
मध्यम और बड़ी इकाइयों : 18 माह में ट्रायल और 24 माह में वाणिज्यिक उत्पादन अनिवार्य होगा।
प्रत्येक यूनिट को जमीन दर का एक प्रतिशत प्रशासनिक शुल्क देना होगा। कार्यरत इकाई के मामले में विशेष ट्रांसफर शुल्क दस प्रतिशत तथा गैर कार्यरत इकाई के मामले में 15 प्रतिशत लागू होगा।
उत्पाद परिवर्तन की स्थिति में माइक्रो और लघु इकाइयों से 5 हजार रुपये, मध्यम और बड़ी इकाइयों से 20 हजार रुपये लिए जाएंगे। आवेदन शुल्क क्रमशः 5 हजार रुपये और 10 हजार रुपये निर्धारित है। इसके अतिरिक्त आवेदक को जमीन दर की 5 प्रतिशत बैंक गारंटी देनी होगी, जिसकी वैधता 24 माह होगी।
आवेदक को तिमाही प्रगति रिपोर्ट देनी होगी। रिपोर्ट में जीएसटी रिटर्न, बिजली बिल और आयकर रिटर्न जैसे प्रमाणपत्र शामिल होंगे। शर्तों का पालन नहीं होने पर बियाडा को आवंटित जमीन का कब्जा लेने और उसे तीसरे पक्ष को आवंटित करने का अधिकार होगा।