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एकता के सूत्र में बांधती है हिंदी, गर्व से करें प्रयोग 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हिंदी दिवस (14 सितंबर) की शुभकामनाएं दी है। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि बिहार में राजभाषा के रूप में हिंदी सरकारी कामकाज की भाषा है। सभी लोग अपने कामकाज में हिंदी को ही अपनाएं। गर्व एवं सम्मान के साथ हिंदी सीखें एवं प्रयोग करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत विविधताओं का देश है। यहां अनेक भाषाएं बोली जाती हैं। हिंदी देश में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। यह भाषा देश के सभी लोगों को एकता के सूत्र में बांधती है। 

राष्ट्र को एकजुट रखने में हिंदी का बहुत बड़ा योगदान है। यह हमारी राष्ट्रीय अस्मिता की पहचान तथा जनमानस की अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने राजभाषा हिंदी के चतुर्दिक विकास की कामना की है। 

बिहार विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव ने अपने संदेश में कहा कि हिंदी मातृभाषा के साथ भारतीय संस्कृति, सभ्यता और सामाजिक एकता का प्रतीक है। 

यह दिन हमें अपनी मातृभाषा के प्रति गर्व और सम्मान की भावना विकसित करने का अवसर देता है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कई प्रमुख साहित्यकार और स्वतंत्रता सेनानियों ने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए प्रयास किए। 

इसका इतिहास 14 सितंबर 1949 से जुड़ा है जब भारतीय संविधान सभा ने हिंदी भाषा को देवनागरी लिपि में भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार किया था। 14 सितंबर 1953 को पहली बार हिंदी दिवस मनाया गया। 
 


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