बिहार में निवेशकों के लिए उद्योग लगाना आसान हो गया है। राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद (SIPB) सचिवालय से किसी आवेदन की अनुशंसा करने के बाद संबंधित सक्षम प्राधिकार को 30 दिनों के अंदर अथवा निर्धारित समय-सीमा के अंदर स्वीकृति देना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था केवल प्रशासनिक निर्देश नहीं, विधिक रूप से बाध्यकारी होगी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि उद्योगों की स्थापना से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान कर निवेशकों को अनावश्यक विलंब और प्रशासनिक जटिलताओं से पूरी तरह मुक्ति मिले।
यदि कोई विभाग अथवा सक्षम प्राधिकार निर्धारित समय-सीमा के भीतर निर्णय लेने में विफल रहता है, तो निवेशकों के हित की रक्षा करते हुए SIPB सचिवालय ‘डीम्ड क्लीयरेंस‘ जारी कर देगा। इस स्वीकृति का अनुपालन संबंधित विभाग के लिए अनिवार्य होगा तथा उस पर पुनर्विचार की कोई शक्ति नहीं होगी।
नई व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न तकनीकी एवं विनियामक विभागों के सक्षम अधिकारियों को सीधे SIPB सचिवालय में प्रतिनियुक्त किया जाएगा। ये सभी अधिकारी विकास आयुक्त के प्रत्यक्ष प्रशासनिक नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण में काम करेंगे। इससे सभी निर्णय एक ही मंच पर शीघ्र लिए जा सकेंगे। यह निर्णय राज्य को आत्मनिर्भर और विकसित बिहार के लक्ष्य को गति प्रदान करेगा।