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बिहार के तीन उत्पादों को मिला GI टैग 

बिहार के तीन पारंपरिक उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिला है। इनमें नालंदा की बावन बूटी साड़ी एवं फैब्रिक, गया का पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट और भोजपुर की पिढ़िया पेंटिंग शामिल हैं। इससे बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक कला-कौशल एवं ग्रामीण प्रतिभा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।  

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस उपलब्धि के लिए राज्य के शिल्पकार, बुनकर, कलाकार एवं संस्थाओं को बधाई दी है। साथ ही नाबार्ड, संबंधित विभाग, उत्पादक समूह, शिल्पकार संगठन और हितधारकों के प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पारंपरिक उद्योग, हस्तशिल्प, हथकरघा एवं लोक कलाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। GI टैग मिलने से इन उत्पादों के विपणन, ब्रांडिंग और निर्यात की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।


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