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पान की खेती को प्रोत्साहित करेगी सरकार

 पटना । सूबे के लगभग 17 जिलों में पान की खेती होती है। पान उत्पादक किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री बागवानी मिशन योजना के तहत पान को विशेष फसल के रूप में चिन्हित किया गया है। इसके लिए विशेष कार्य योजना तैयार कर पान उत्पादक कृषकों को प्रोत्साहित किया जायेगा। दरभंगा, भागलपुर, मोतिहारी, औरंगाबाद, नवादा, खगड़िया, बेगूसराय, नालंदा, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, सिवान, गया, सारण, मधुबनी, समस्तीपुर, वैशाली एवं शेखपुरा के 1,620 एकड़ में पान की खेती हो रही है। 
कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने बताया कि उत्तर बिहार में एक बार पान लगाकर बीस-पच्चीस वर्ष तथा दक्षिणी बिहार में दो वर्षों तक अच्छी उपज प्राप्त की जा सकती है। इस फसल से पचास हजार रुपये प्रति हेक्टेयर वार्षिक आय प्राप्त की जा सकती है। यहां पान की बंगला एवं मगही किस्म उपलब्ध है। मगही पान अन्य देशों में निर्यात किया जाता है। बिहार की जलवायु अधिक गर्म एवं अधिक ठंडी होने के कारण इसकी खेती खुले खेतों में नहीं की जा सकती है। इसलिए इसे कृत्रिम मंडप के अंदर उगाया जाता है, जिसे बरेजा या बरेठ कहते हैं।। पान की रोपाई मई से जुलाई के बीच होती है।
पान का धार्मिक, सामाजिक एवं औषधीय महत्व है। पान खाना पाचन क्रिया के लिए भी फायदेमंद है। यह सैलिवरी ग्लैंड को सक्रिय कर लार बनाने का काम करता है जो कि खाने को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ता है। कब्ज व मुंह दुर्गंध से परेशान लोगों के लिए भी पान चबाना फायदेमंद है। पान में विटामिन बी, विटामिन सी, कैल्शियम, लोहा, फाॅस्फोरस के अतिरिक्त प्रोटीन, वसा, कार्बोहाईड्रेट रेशा एवं खनिज पदार्थ पाये जाते हैं। पान के पत्ते में अनिवार्य तेल की मात्रा 0.7 से 2.6 प्रतिशत है। इस कारण पत्तियों में सुगंध होती है। 


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