पटना। मशरूम की खेती किसानों के लिए लाभदायक है। इससे किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। इसकी खेती सालों भर बिना खेत के हो सकती है। घर या झोपड़ी में कृषि अवशेष जैसे भूसा अथवा पुआल का उपयोग कर इसका उत्पादन हो सकता है। यह कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाला फसल है। मशरूम उत्पादन के बाद बचे अवशेषों का उपयोग कंपोस्ट में हो सकता है।
कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने बताया कि मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मशरूम बीज एवं कंपोस्ट किट वितरण योजना चलायी जा रही है। इसके तहत लाभुकों को 90 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। 2017-18 में 4,33,333 मशरूम बीज एवं कंपोस्ट किट वितरण का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि बिहार की जलवायु विभिन्न प्रकार के मशरूम उत्पादन के लिए उपयुक्त है। राज्य में मशरूम की विभिन्न प्रजातियों में बटन मशरूम, गर्मा बटन मशरूम, ओयस्टर मशरूम, पैडीस्ट्रा मशरूम एवं स्वेत दूधिया मशरूम व्यावसायिक स्तर पर उगाया जा रहा है।
मशरूम पौष्टिक तत्व एवं औषधीय गुणों से भरपूर होता है। मशरूम में प्रचूर मात्रा में प्रोटीन, सोडियम, आयरन, रेशा, विटामिन बी काॅम्प्लेक्स, विटामिन सी एवं डी होता है। मधुमेह एवं यक्ष्मा मरीजों के लिए यह अचूक खाद्य पदार्थ है।