पटना। कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने कहा कि रबी फसल के उत्पादन बढ़ाने के लिए विभाग प्रयासरत है। इसके तहत किसानों को अनुदान उपलब्ध कराने व प्रचार-प्रसार के लिए प्रखंड स्तर तक रबी महोत्सव का आयोजन हो रहा है। 43.25 लाख हेक्टेयर से 136.80 लाख मैट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उक्त बातें वे दो दिवसीय राज्य स्तरीय रबी कार्यशाला, 2017 के उद्घाटन के मौके पर बामेती, पटना में कह रहे थे।
डाॅ प्रेम ने कहा कि 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए पंचायत स्तर पर किसान महाचैपाल व हर जिले में कृषि मंत्री किसानों के द्वार कार्यक्रम का आयोजन होगा। किसानों की समस्याओं को दूर करने के लिए मिले सुझावों के आधार पर विशेष फसल की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। राज्य में जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को पक्का वर्मी बेड इकाई, प्री-फ्रेब्रिकेटेड इकाई, व्यावसायिक वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन, गोबर गैस व जैव उर्वरक व्यावसायिक उत्पादन इकाई के लिए सरकार 50 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है। राष्ट्रीय एवं मुख्यमंत्री बागवानी मिशन के अंतर्गत नर्सरी लगाने, टीशू कल्चर केला व सिंचाई आदि कार्यक्रमों में 50 प्रतिशत अनुदान मिल रहा है। साथ ही 71 कृषि यंत्रों पर 50 प्रतिशत तक अनुदान की व्यवस्था है।
कृषि उत्पादन आयुक्त सुनील कुमार सिंह ने बताया कि कृषि के समग्र विकास के लिए 3 अक्टूबर को कैबिनेट ने कृषि रोड मैप (2017-22) के लिए 1.54 लाख करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। दो दिवसीय कार्यशाला रबी मौसम में फसल उत्पादन बढ़ाने की रणनीति तथा कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन के लिए आयोजित की गई है। उन्होंने कहा कि जैविक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए गंगा के तटवर्ती जिलों में विशेष अभियान चलेगा। इन जिलों के कृषि पदाधिकारी पंचायत एवं प्रखंड स्तर पर कार्यरत प्रसार कर्मियों की टीम बनाकर किसानों को विशेषकर जैविक सब्जी उत्पादन के लिए प्रशिक्षित करेंगे। कृषि विश्वविद्यालय की भी खास भूमिका है। वे किसानों को नई-नई तकनीक से अवगत कराते हैं।
प्रधान सचिव सुधीर कुमार, कृषि निदेशक हिमांशु कुमार राय एवं उद्यान निदेशक अरविन्दर सिंह ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर कृषि विभाग के वरीय पदाधिकारी धनंजयपति त्रिपाठी, निदेश (पीपीएम) गुलाब यादव, निदेशक (भूमि संरक्षण) गणेश राम, निदेशक (बामेती), कृषि वैज्ञानिक समेत प्रगतिशील किसान व विक्रेता मौजूद थे।