नई दिल्ली/एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली में पटाखों की बिक्री पर बैन की अवधि बढ़ाने से परेशानी खड़ी हो गई है। इसका सबसे अधिक असर शिवकासी (तमिलनाडु) पर होगा। शिवकासी का पटाखा उद्योग 7 हजार करोड़ रुपये का है और देश के कुल पटाखा उद्योग में इसकी हिस्सेदारी 85 प्रतिशत है। पटाखा बैन से पटाखा उद्योग को करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।
तमिलनाडु के इस छोटे से शहर में पटाखा बनाने वाले सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से नाराज और डरे हुए हैं। उन्हें डर इस बात का है कि दिल्ली में पटाखा बैन के बाद अन्य राज्य भी ऐसा आदेश न जारी कर दें। शिवकासी में पटाखा उद्योग से जहां सीधे तौर पर करीब 3 लाख वर्कर जुड़े हुए हैं, वहीं यह उद्योग 5 लाख वर्कर्स को अप्रत्यक्ष रूप से काम देता है। पटाखा बनाने वालों का कहना है कि दिवाली के समय ही उन्हें सबसे अधिक प्रॉफिट होता है और सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पूरी तरह से खत्म हो जाएंगी।
सुप्रीम कोर्ट का यह है फैसला : कोर्ट ने दिल्ली व एनसीआर में पटाखे फोड़ने पर पाबंदी नहीं लगाई है। दूसरे राज्यों से पटाखा लाने पर भी कोई रोक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर बैन का बीते नवंबर का उसका आदेश 31 अक्टूबर तक जारी रहेगा। जस्टिस ए.के. सीकरी की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि सर्वोच्च अदालत का 12 सितंबर का वह आदेश, जिसमें अस्थायी तौर पर स्टे हटाने और पटाखों की बिक्री का आदेश देने की बात कही गई थी, 1 नवंबर से लागू होगा।