नई दिल्ली/एजेंसी । 71 साल पहले एयर इंडिया की स्थापना करने वाले टाटा ग्रुप को कंपनी का नियंत्रण छोड़ना पड़ा था, लेकिन टाटा ग्रुप अब फिर से एयर इंडिया को अपना हिस्सा बनाना चाहता है। अगर टाटा ग्रुप एयर इंडिया का अधिग्रहण कर लेता है, तो वह एयर इंडिया का स्वामित्व उसके राष्ट्रीयकरण होने के 64 साल बाद पा लेगा। सरकार घाटे में चल रही एयर इंडिया को बेचने की तैयारी में है।
टाटा संस ने टाटा एयरलाइंस की स्थापना 1932 में की थी। कराची से बॉम्बे की पहली फ्लाइट खुद जेआरडी टाटा ने उड़ाई थी। 1946 में टाटा एयरलाइंस सार्वजनिक कंपनी बन गई और इसका नाम बदलकर एयर इंडिया कर दिया गया। प्लेन उड़ाना जेआरडी टाटा का शौक था। कंपनी की वेबसाइट से मिली जानकारी के अनुसार जहाज उड़ाने के लिए क्वालिफाई करने वाले वह पहले भारतीय थे। हवाई जहाज उड़ाने का लाइसेंस उन्हें 1929 में मिला। 1948 में उन्होंने एयर इंडिया इंटरनैशनल की स्थापना की। 1978 तक वह एयर इंडिया की जिम्मेदारी संभालते रहे।
1953 में जब सरकार ने एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण कर दिया तब वह दुनिया की श्रेष्ठ एयरलाइंस में थी। टाटा को जब पता चला कि तत्कालीन पीएम जवाहर लाल नेहरू ने एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण कर दिया है। वह भी उन्हें बिना बताए तो उन्हें बड़ा झटका लगा। हालांकि टाटा ने राष्ट्रीयकरण के बाद एयरलाइंस के चेयरमैन का पद संभाल लिया। उनके नेतृत्व में कंपनी 1977 तक अच्छे से संचालित होती रही। 1977 में पीएम मोरारजी देसाई ने टाटा को उनके पद से हटा दिया।
आज एयर इंडिया खराब संचालन और नाकामयाब बिजनस करने का उदाहरण बन गई है। कंपनी पर भारी कर्ज है और यही कारण है कि सरकार इसका निजीकरण कर इससे छुटकारा पाना चाहती है। नरेंद्र मोदी सरकार 2014 में सत्ता संभालने के बाद से करीब 16 हजार करोड़ रुपये एयर इंडिया में लगा चुकी है। एयर इंडिया की फ्लीट में 118 जहाज हैं। इसके अलावा कंपनी को दुनियाभर के बड़े एयरपोर्ट्स में पार्किंग स्लॉट्स मिले हुए हैं जिनमें न्यूयॉर्क, शिकागो और लंदन शामिल है।