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किसान अब खुद तैयार कर सकेंगे जैविक खाद

पटना। कृषि कार्य में रासायनिक खाद व कीटनाशक के अधिक इस्तेमाल का प्रतिकूल असर मिट्टी के साथ मानव के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। रासायनिक खाद एवं कीटनाशक  की बढ़ती कीमत के कारण खेती की लागत बढ़ गयी है एवं किसानों को उस अनुपात में लाभ नहीं हो रहा है। इस कारण सरकार ने नये रूप में एक खास योजना परंपरागत कृषि विकास योजना के नाम से चलाने का निर्णय लिया है। इस योजना में जैविक तरीके से ही खेती की जाएगी, लेकिन इनमें प्रयोग होने वाले अधिकतर जैविक खाद एवं कीटनाशक किसान अपने घर पर ही तैयार कर सकेंगे। इससे उनकी लागत कम होगी और आय में वृद्वि होगी । 
कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने बताया कि केंद्र सरकार ने जैविक खेती एवं उसके पार्टिसिपेटरी गारंटी सिस्टम (पीजीएस) पर आधारित जैविक प्रमाणीकरण के लिए परंपरागत कृषि विकास योजना की शुरूआत की है। इस योजना के तहत जैविक विधि से खेती एवं पीजीएस आधारित जैविक प्रमाणीकरण के लिए अनुदान का प्रावधान है। जैविक खेती एवं प्रमाणीकरण का काम चयनित कलस्टर में लगातार तीन वर्षों तक होगा। जैविक उपादान को बढ़ावा देने के लिए किसानों को अधिकतम एक हेक्टेयर तक के लिए सहायता अनुदान मिलेगा। एक कलस्टर के लिए तीन वर्षों में 14,95,000 रुपये तक का अनुदान मिलेगा। जिसमें 9,50,000 रुपये किसानों को तथा 5,45,000 रुपये मोबिलाइजेशन एवं पीजीएस सर्टिफिकेशन के लिए देय होगा। 
 


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