सबौर/पटना/18.07.19। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर (भागलपुर) को पूर्वी भारत में पहला एवं राष्ट्रीय स्तर पर 18 वां स्थान मिला है। रैंकिंग वर्ष 2018 के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने जारी किया है। देश में 60 कृषि विश्वविद्यालय हैं। नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट करनाल को देश में पहला एवं इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट नई दिल्ली को दूसरा स्थान मिला है।
2017 में बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) सबौर की रैंकिंग 21 एवं 2016 में 24 थी। दो दिन पहले ही बीएयू के कृषि विज्ञान केंद्र को देश के श्रेष्ठ केंद्र का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। सभी उपलब्धियों पर कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने बीएयू के कुलपति, वैज्ञानिक, अधिकारी, छात्र एवं कर्मियों को बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि हमारा लक्ष्य शीर्ष पांच में आना है, जिसे कृषि वैज्ञानिकों की मेहनत से पूरा किया जायेगा।
कुलपति डाॅ अजय कुमार सिंह ने भी विश्वविद्यालय परिवार को बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि हमें कड़ी मेहनत एवं निष्ठा के साथ शिक्षण, शोध एवं प्रसार कार्यक्रमों में गुणवत्ता लाने के साथ नवाचार पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। पिछले नौ साल में कई कीर्तिमान स्थापित हुए हैं जिससे कि राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पटल पर बीएयू की पहचान बनी है।
बीएयू की उपलब्धियां : शोध परिषद ने धान की सबौर हर्षित, सबौर संपन्न, तीसी की सबौर तीसी 2 और मक्का की सबौर संकर मक्का 1 अनुशंसित की है। खेती की दस उन्नत कृषि तकनीक को विकसित कर किसानों को उपलब्ध करायी है। फसलों में आर्सेनिक प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एक सक्षम जीवाणु चिन्हित कर उसके व्यवहार की तकनीक विकसित की है।
बिहार की विरासत के रूप में विख्यात जर्दालु आम, कतरनी धान एवं मगही पान को पिछले साल एवं इस वर्ष शाही लीची को बीएयू के प्रयास से भारत सरकार ने भौगोलिक सूचक प्रदान की है। बीएयू ने विभिन्न फसलों के 12,000 क्विंटल से अधिक बीज उत्पादित करके किसानों को उपलब्ध कराया है। साथ ही छह लाख फल के पौधे एवं 1.25 लाख से अधिक टिशू कल्चर तकनीक से उत्पादित केले के रोगमुक्त पौधे तैयार कर किसानों को उपलब्ध कराया है।
देश में पहली बार विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय किसान विज्ञान कांग्रेस का आयोजन किया, जिसमें विभिन्न राज्यों से सैकड़ों विशेषज्ञ, वैज्ञानिक एवं उत्कृष्ठ किसान शामिज हुए।