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एमएसएमई की अधिक संभावना, बैंक करे सहयोग 

पटना/22.08.19। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि बिहार में बड़े उद्योग से अधिक माइक्रो, स्माॅल एवं मीडियम (एमएसएमई ) स्केल इंडस्ट्रीज की संभावना है। बैंकों के सहयोग से इस काम में तेजी आ सकती है। राज्य सरकार उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए इंडस्ट्रियल प्रमोशनल पॉलिसी के माध्यम से सहायता कर रही है। सीएम होटल मौर्या में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की 69 वीं समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।  

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य का ग्रोथ रेट 11.3 प्रतिशत है। यह राष्ट्रीय औसत एवं देश के अन्य राज्यों से अधिक है। राज्य की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है। बावजूद आबादी अधिक होने के कारण प्रति व्यक्ति आय 40 हजार रुपये से कम है। बिहार के पिछड़ेपन और गरीबी को दूर करने में बैंकिंग सिस्टम की बड़ी भूमिका हो सकती है। 

लैंड लॉक स्टेट होने के कारण बिहार के लिए स्पेशल स्टेटस की मांग बराबर हो रही है। ऋण-जमा अनुपात (सीडी रेशियो) का राष्ट्रीय औसत 75 प्रतिशत है जबकि बिहार का रेशियो 45 प्रतिशत है। बिहार के लोगों का बैंकों पर सबसे ज्यादा भरोसा है। वे अपने बचे पैसों को बैंक में ही जमा करते हैं। 

सीएम ने कहा कि बिहार में अब तक साढ़े आठ लाख जीविका समूह का गठन हो चुका है। जिससे एक करोड़ महिलाएं जुड़ी हैं। हमारा लक्ष्य 10 लाख जीविका समूह बनाने का है। जीविका समूह पर बैंक विशेष ध्यान दें।  बैंक अगर कोई बड़ी राशि लेकर जा रहे हैं, तो इसकी सूचना थाने को अवश्य दें। सरकार अपनी तरफ से छात्रों को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के माध्यम से शिक्षा ऋण मुहैया करा रही है। बैंकों को भी एजुकेशन लोन देने के लिए सोचना चाहिए।

बिहार की 76 प्रतिशत लोगों की आजीविका कृषि है। पशु एवं मत्स्य पालन की काफी संभावनाएं हैं। बैंक इस क्षेत्र में क्रेडिट दे, तो लोगों को काफी मदद मिलेगी। बिहार के हर ग्राम पंचायत में बैंक शाखा खोलकर बिहारवासियों की मदद कीजिए। 

एसएलबीसी की बैठक को आरबीआई के डिप्टी गवर्नर महेश कुमार जैन, एसबीआई के सीजीएम एमके गोयल एवं एमडी पीके गुप्ता ने भी संबोधित किया।
 


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