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बीएयू ने बदलते मौसम के अनुरूप रिसर्च पर दिया जोर

सबौर (भागलपुर)। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) जलवायु परिवर्तन से जुड़े मसलों पर विश्व की विभिन्न संस्थानों के साथ काम शुरू करेगा। इससे बदलते मौसम के अनुरूप प्रभेद और तकनीक विकास में सहूलियत मिलेगी। विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ अजय कुमार सिंह ने दो दिवसीय शोध परिषद की 18वी बैठक में ये बातें कहीं। 

उन्होंने कहा बिहार के किसान और वैज्ञानिकों की बदौलत राज्य को केंद्र सरकार ने पांचवीं बार कृषि कर्मण पुरस्कार से सम्मानित किया है। बीएयू की रैंकिंग 21वें से 18वें पर आ गई है। परिषद की बैठक में चना एवं बैंगन के एक-एक प्रभेद एवं चार नई तकनीक को जारी करने की संभावना है।  

संस्थान के निदेशक अनुसंधान डाॅ आईएस सोलंकी ने बताया कि विश्वविद्यालय के प्रयास से राज्य को पहली बार मगही पान, शाही लीची, कतरनी धान और जर्दालु आम का भौगोलिक सूचकांक (जीआई) केंद्र सरकार ने प्रदान किया। पांच अलग-अलग क्षेत्रों में 484 शोध परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जिनमें 122 पूरी हो चुकी हैं। बीएयू के नौ साल के कार्यकाल में फसलों के 20 उन्नत प्रभेद और 40 तकनीक विकसित किये गये हैं। 

शोध परिषद के उदघाटन सत्र में डाॅ ए.आर.पाठक (वीसी, जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय), डाॅ विशाल नाथ (निदेशक, राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र मुजफ्फरपुर), कटिहार से प्रगतिशील किसान अरुण कुमार एवं मुंगेर से रंजू कुमारी समेत कई जिलों से किसान शामिल हुए। 


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