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फसल अवशेष जलाने पर नहीं मिलेगा अनुदान 

पटना/14.10.19। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि फसल की कटाई के बाद खेत में बचे अवशेष (पुआल, भूसा, खूंटी)  जलाने वाले किसानों को अनुदान का लाभ नहीं मिलेगा। राज्य सरकार ने पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव का देखते हुए यह निर्णय लिया है। पर्यावरण संरक्षण के लिए जल-जीवन-हरियाली अभियान शुरू किया गया है। 

सीएम फसल अवशेष प्रबंधन पर ज्ञान भवन में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उदघाट्न सत्र को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन का आयोजन कृषि विभाग और बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर ने किया है। 

सीएम ने कहा कि किसानों को फसल अवशेष खेत में नहीं जलाने को लेकर लगातार जागरूक किया जा रहा है। बावजूद यह प्रवृत्ति देखी जा रही है। इससे किसानों के खेत की उर्वरा शक्ति कम होने के साथ पर्यावरण को भी नुकसान हो रहा है। 

उन्होंने कृषि वैज्ञानिक एवं अधिकारियों से कहा है कि दो दिवसीय सम्मेलन से निकले निष्कर्षों पर बनी लघु फिल्म को किसानों को दिखाएं। किसानों को यह बताना जरूरी है कि फसल अवशेष भी उनकेे लिए लाभदायक है। इससे जैविक खाद एवं अन्य सामान तैयार किये जा सकते हैं। 

पंजाब-हरियाणा में भी पराली (पुआल) जलाने पर रोक के लिए अभियान चलाया गया है, लेकिन यह प्रवृति रुक नहीं रही है। इसके मूल कारणों को समझना होगा। बिहार में पंजाब के कम्बाइंड हार्वेस्टर का उपयोग बढ़ता जा रहा है। आशंका है कि कम्बाइंड हार्वेस्टर का उपयोग करने वाले किसानों को पराली जलाने के संबंध में गलत जानकारी दी जा रही हो।    

किसानों की सहायता के लिए राज्य सरकार बिजली 75 पैसे प्रति यूनिट पर दे रही है। साथ ही प्रति लीटर डीजल पर 60 रुपये की सब्सिडी भी मिल रही है। दो दिवसीय सम्मेलन में परिचर्चा में आयी उपयोगी बातें कार्य योजना में शामिल की जायेंगी ।

कार्यक्रम को डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी, कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार, सीएम के पूर्व कृषि सलाहकार डॉ मंगला राय, एसीआईएआर के डॉ एरिक हटनर एवं कृषि विभाग के सचिव एन. श्रवण कुमार ने भी संबोधित किया।

इस अवसर पर देश-विदेश के कृषि वैज्ञानिक, राज्यों से आये किसान, बिहार कृषि विश्वविद्यालय के वीसी डाॅ अजय कुमार सिंह, राजेंद्र कृषि विवि के कुलपति डॉ आरसी श्रीवास्तव, सीएम के प्रधान सचिव चंचल कुमार, सचिव मनीष कुमार वर्मा, ओएसडी गोपाल सिंह, राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद के अध्यक्ष डॉ एके घोष एवं कृषि विभाग के निदेशक आदेश तितरमारे मौजूद थे।
 


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