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पराली को नहीं जलाएं, इसे आय का जरिया बनाएं 

पटना/15.10.19। फसल अवशेष प्रबंधन पर ज्ञान भवन में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन आज हो गया। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) सबौर सम्मेलन में आये विशेषज्ञों के सुझावों को संकलित कर कृषि विभाग को उपलब्ध करायेगा, जिस पर नीतिगत निर्णय लिया जायेगा।

इस मौके पर कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने कहा कि दो दिनों के मंथन में निकले निष्कर्षों को किसानों तक पहुंचाएं। किसानों को बताएं कि पराली (पुआल, भूसा, खूंटी) को जलाने की जगह इसे आमदनी का जरिया बनाया जा सकता है।   

कृषि मंत्री ने विभाग के सभी पदाधिकारी, राज्य के वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञों से अनुरोध किया कि इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करें। इस जानकारी को खेतों तक ले जाएं। इसे एक अभियान के रूप में चलाने की जरूरत है। यह सेमिनार देश ही नहीं बल्कि विश्व को एक नई दिशा दिखाने का काम करेगा। 

उन्होंने कहा कृषि विभाग, राज्य के दो कृषि और एक पशु विज्ञान विश्वविद्यालय मिलकर बड़े पैमाने पर किसानों का क्षमता वर्धन करेंगे। पंचायत स्तर पर होने वाले किसान चौपाल एवं अन्य विभागीय कार्यक्रमों में फसल अवशेष प्रबंधन का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जायेगा। कृषि विज्ञान केंद्र एवं जिलों में आत्मा के माध्यम से किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन, फसल अवशेष से वर्मी कम्पोस्ट बनाने एवं दैनिक कार्यों में उपयोग के लिए प्रशिक्षित किया जायेगा। 

कृषि विभाग के सचिव एन. सरवण कुमार ने कहा कि फसल अवशेष प्रबंधन का वृहत प्रचार-प्रसार किया जायेगा। इससे संबंधित उपयोगी कृषि यंत्रों पर अनुदान की राशि बढ़ायी गई है। कृषि निदेशक आदेश तितरमारे ने यह फसल अवशेष नहीं, विशेष है शीर्षक कविता के जरिये अपने विचार व्यक्त किये। 

इस अवसर पर पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान से आये किसान, बीएयू सबौर के कुलपति डाॅॅ अजय कुमार सिंह, बीएयू के प्रसार निदेशक डाॅ आर के सोहाने, देश-विदेश से आये कृषि वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ, सहायक प्रसार निदेशक डाॅ आर एन सिंह, कृषि विभाग एवं बीएयू के पदाधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
 


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