पटना/04.11.19 । वायु प्रदूषण कम करने के लिये राज्य सरकार ने 15 वर्ष पुराने व्यावसायिक वाहन एवं सरकारी वाहनों को प्रतिबंधित करने का निर्देश दिया है। साथ ही 15 वर्ष से अधिक निजी वाहनों की फिटनेस जांच का भी निर्देश दिया गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिये एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की।
बैठक के दौरान सीएम ने कहा कि शहरों में ऑटो एवं सिटी बसों में केरोसिन के उपयोग की भी शिकायत मिल रही है। उन्होंने इसकी जांच के निर्देश दिये। सूबे के ईंट-भट्ठे खासकर पटना के समीप के इलाकों में कार्यरत ईंट-भट्ठे प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिये आधुनिक तकनीक का उपयोग कर रहे हैं या नहीं। इस पर सख्ती करने पर उन्होंने जोर दिया। शहर में कचरा उठाने वाली गाड़ी कचरे को ढंककर ही डंपिंग प्वाईंट पर ले जायेे। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के बाहर की तकनीक के अध्ययन की जरूरत है कि कैसे शहरों में धूल कण न रहे। पुराने डीजी सेट बैन किये गये हैं।
सीएम ने कहा कि पराली (पुआल) जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकना है। कम्बाइंड हार्वेस्टर के माध्यम से फसलों की कटाई करने वाले लोगों को जागरूक करना है कि पराली न जलायें। किसानों को यह जानकारी देनी होगी पराली जलाने वालों को कृषि से संबंधित सब्सिडी नहीं दी जायेगी। कल से पटना की मुख्य सड़कों और कंस्ट्रक्शन साइट्स पर पानी का छिड़काव होगा। इलेक्ट्रिक एवं सीएनजी वाहनों को बढ़ावा दें। गृह निर्माण सामग्री की ढुलाई ढंककर कर करें।
इससे पहले पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रधान सचिव दीपक कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री को बिहार के वायु प्रदूषण की स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पटना, गया और मुजफ्फरपुर को देश के 102 ननअटेनमेंट सिटी के रूप में चिह्नित किया गया है। प्रदूषण के कारण एवं नियंत्रण के लिए जिला स्तर पर डीएम की अध्यक्षता में कमिटी बनायी गयी है।
बैठक में डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी, मुख्य सचिव दीपक कुमार, सीएम के प्रधान सचिव चंचल कुमार, बिहार स्टेट पाॅल्यूशन बोर्ड के अध्यक्ष एके घोष, सचिव आनंद किशोर, एन. सरवन कुमार, मनीष कुमार वर्मा, संजय कुमार अग्रवाल एवं अनुपम कुमार, पटना के डीएम, पटना नगर निगम के आयुक्त, एसएसपी, भारतीय मौसम विज्ञान केन्द्र के प्रतिनिधि सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।