कानपुर । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कानपुर में राष्ट्रीय गंगा पर्षद की पहली बैठक हुई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अनुपस्थिति में बिहार का पक्ष डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने रखा। उन्होंने गंगा सहित बिहार की अन्य नदियों में गाद की वजह से बाढ़ की समस्या को रेखांकित करते हुए राष्ट्रीय गाद नीति बनाने की मांग की।
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं केंद्र के अन्य आठ मंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री ने कानपुर के 128 साल से बंद सीसामऊ नाले का गंगा में वोटिंग के जरिये निरीक्षण किया। इससे प्रतिदिन एक करोड़ लीटर गंदा पानी गंगा में प्रवाहित होता था।
इस दौरान सुशील कुमार मोदी ने बिहार के सभी 142 नगर निकायों से निकलने वाले दूषित जल को नदियों में प्रवाहित करने की जगह नमामि गंगे परियोजना की तर्ज पर एसटीपी एवं सिवरेज नेटवर्क का निर्माण कर शोधित करने की मांग की।
उन्होंने पीएम को बताया कि नमामि गंगे परियोजना के तहत पटना के नौ सिवरेज प्रोजेक्ट सहित राज्य के अन्य 22 शहरों में 5,186 करोड़ की लागत से 28 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। पटना के बेऊर और करमलीचक में जहां एसटीपी का काम पूरा हो गया है, वहीं अधिकतर शहरों में दिसंबर, 2020 तक काम पूरा करने का लक्ष्य है।
राज्य सरकार ने नीतिगत निर्णय लिया है कि एसटीपी से शोधित जल को नदी में प्रवाहित नहीं करके उसका उपयोग कृषि कार्य में किया जायेगा। नमामि गंगे के तहत गंगा किनारे के 12 जिलों को जैविक काॅरीडोर के रूप में विकसित करने के लिए 155.88 करोड़ की स्वीकृति दी गयी है। भोजपुर, बक्सर, छपरा, वैशाली व पटना जिले में 103 कलस्टर में जैविक खेती का काम प्रारंभ कर दिया गया है।
बिहार के सुल्तानगंज-कहलगांव तक के सात किलोमीटर के विस्तार को विक्रमशिला गंगेय डाॅल्फिन सेंचुरी घोषित किया गया है। 2018-19 के सर्वे के अनुसार बिहार की नदियों में 1,455 डाॅल्फिन पाये गये हैं। बिहार सरकार शीघ्र ही पटना विश्वविद्यालय में डाॅल्फिन शोध संस्थान स्थापित करेगी।