सबौर (भागलपुर)। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) ने नई किस्म सबौर हर्षित धान एवं सबौर चना-1 विकसित की है। अगले सीजन से इनके बीज किसानों के लिये उपलब्ध हो जायेंगे । सबौर हर्षित धान में जहां सूखा सहन करने की अधिक क्षमता है, वहीं सबौर चना-1 कई रोगों से मध्यम प्रतिरोध एवं यांत्रिक विधि से कटाई के लिए उपयुक्त है।
सबौर हर्षित धान - 120 से 125 दिनों में पककर तैयार होने वाले सबौर हर्षित धान (प्रभेद) के पौधे की ऊंचाई 110-115 सेमी और दाना पतला होता है। इसका बाजार मूल्य अपेक्षाकृत अधिक है।
सबौर हर्षित धान की सबसे खास बात है कि इसमें सूखा सहन करने की अधिक क्षमता है। सामान्य परिस्थितियों में जहां यह किस्म जल्दी पकने के साथ 45 से 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज देता है, वही सुखाड़ की स्थिति में भी इससे बहुत अच्छी उपज 25 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त होती है।
सबौर हर्षित धान को बिहार सरकार पहले ही विमोचित कर चुकी है। 10 अक्टूबर को केंद्रीय प्रभेद विमोचन समिति (सीवीआरसी) ने भी अपनी 83वीं बैठक में इसे अधिसूचित कर दिया है। इसके बाद यह किस्म बीज श्रृंखला (सीड चेन ) में आ गयी है।

सबौर चना 1 - बीएयू के वैज्ञानिकों ने आठ वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद चने की अधिक उपजाऊ किस्म सबौर चना-1 विकसित किया है। यह कीट एवं विभिन्न रोगों से मध्यम प्रतिरोध एवं यांत्रिक विधि से कटाई के लिये उपयुक्त किस्म है।
इसके फूल गुलाबी रंग, दाना बड़े और पीले रंग के होते है। इसके तैयार होने की अवधि 130 से 135 दिन और औसत उपज 22-23 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। अभी बिहार के लिये अनुशंसित किस्म जीसीपी 105 की औसत उपज 18 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।
हाल के वर्षों में मौसम की परिस्थितियों के कारण कटाई में देरी से फल गिरने और दाना के गिरने की समस्या आ रही है। मजदूरों की कमी एवं हाथ से कटाई खेती लागत को बढ़ा रही है। सबौर चना-1 के विशेष गुणों के कारण यांत्रिक विधि से कटाई के लिये उपयुक्त किस्म है। इसकी खेती धान कटनी के बाद परती वाले क्षेत्रों में भी सफलतापूर्वक की जा सकती है।