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कृषि प्रधान राज्यों के लिए पर्यावरण बजट की मांग

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ राज्यों के वित्त मंत्रियों की बजट पूर्व बैठक में डिप्टी  सीएम सह वित्तमंत्री सुशील कुमार मोदी शामिल हुए। उन्होंने बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्यों के लिए पर्यावरण बजट पेश करने का सुझाव दिया। 

इससे जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि एवं स्वास्थ्य पर हो रहे प्रभाव के अध्ययन के लिए राष्ट्रीय स्तर के शोध संस्थान बनाने में सुविधा होगी। साथ ही इसमें प्रत्येक विभाग की ओर से जलवायु परिवर्तन के असर से निबटने के लिए खर्च के प्रावधान और कार्बन फुट प्रिंट को कम करने के लिए किये गये प्रयासों का समावेश भी हो।

जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत बिहार में अगले तीन साल में जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने पर किये जा रहे 13 हजार करोड़ रुपये के खर्च के लिए केंद्र से योजना बना कर मदद मांगी। साथ ही पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के समान बिहार को भी पुआल जलाने से किसानों को रोकने के लिए सहायता की मांग की।

डिप्टी सीएम ने विधवा, वृद्ध व दिव्यांग पेंशन योजना में केंद्रीय अंशदान की राशि बढ़ाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री सुरक्षा, जीवन ज्योति और अटल पेंशन योजना को फिर से पुनर्गठित करने की मांग की। 

उन्होंने जीविका समूह की 22 लाख महिलाओं के दुर्घटना बीमा प्रीमियम की आधी राशि केंद्र द्वारा नहीं जमा कराने का मुद्दा भी उठाया। इसके अलावा स्वयं सहायता समूह की सभी महिलाओं को बैंकों से 10 हजार रुपये का ओवरड्राफ्ट देने, सभी समूह को सात फीसदी ब्याज पर ऋण, समय पर ऋण चुकाने वालों को तीन प्रतिशत ब्याज अनुदान देने एवं ग्रामीण क्षेत्र में बैंक शाखाओं के साथ एटीएम अनिवार्य करने की मांग की। 

मिड डे मील के रसोइया का मानदेय बढ़ा कर तीन हजार करने एवं नमामि गंगे परियोजना में शामिल राज्य के 17 शहरों के अलावा किसी भी नदी के किनारे बसे अन्य सभी शहरों के लिए भी सिवरेज एवं एसटीपी परियोजना स्वीकृत करने की मांग की।
 


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