पटना। इंडियन रोड्स कांग्रेस को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सड़क एवं पुलों के निर्माण के साथ मेंटेनेंस पॉलिसी पर भी ध्यान देने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा सिर्फ एजेंसी पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। इंजीनियर रिसर्च एवं डिजाइन के मास्टर होते हैं। वे चाहें, तो कार्यों को समय पर पूरा करवा सकते हैं। सीएम बापू सभागार में इंडियन रोड्स कांग्रेस के 80वें वार्षिक अधिवेशन को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले 2009 में गांधी मैदान में इंडियन रोड्स कांग्रेस का अधिवेशन हुआ था।
सीएम ने कहा बिहार में 5000 किमी एनएच की सड़कें हैं। कई सड़कों की खराब हालत को ठीक करने की जरूरत है। बिहार में सड़कों के निर्माण एवं रखरखाव संबंधी कार्य में किसी प्रकार का समझौता नहीं होता है। सड़क दुर्घटनाओं पर रोक के लिए चालकों को ट्रेनिंग के साथ जागरूकता की जरूरत है।
सेंट्रल रोड फंड का निर्माण नई सड़कों के निर्माण एवं मेंटेनेंस के लिए किया गया है। सेंट्रल रोड फंड से केंद्र सरकार अपनी सड़कों का निर्माण करती है। साथ ही कुछ अंश राज्यों को भी सड़क निर्माण के लिए देती है। फंड से बिहार के हिस्से की राशि मिलनी चाहिए। पर्यावरण के अनुकूल सड़क निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। राज्य में सड़कों के किनारे पौधे लगाने का निर्णय लिया गया है।

उन्होंने कहा राज्य के सुदूर क्षेत्र से छह घंटे में पटना पहुंचने के लक्ष्य को प्राप्त कर लिया गया है। अब पांच घंटे के लक्ष्य पर काम हो रहा है। ग्रामीण कार्य विभाग के अंतर्गत ग्रामीण सड़कों को भी दुरुस्त किया जा रहा है। साथ ही हर गांव को पक्की सड़कों से जोड़ा जा रहा है।
इन्हें मिला सम्मान - लाइफ टाइम एचिवमेंट पुरस्कार सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के पूर्व महानिदेशक को, नेहरु पुरस्कार आईआईटी मुंबई के डॉ धर्मवीर सिंह को और बिहार पीडब्ल्यूडी पुरस्कार डॉ हेमंत कुमार, डॉ संगीता एवं डॉ वंदना को दिया गया।
कार्यक्रम को डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी, पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव, इंडियन रोड्स कांग्रेस के अध्यक्ष टोली बसर, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के महानिदेशक आईके पांडेय एवं पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव अमृत लाल मीणा ने भी संबोधित किया।