पटना। बिहार में मधुमक्खीपालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने किसान उत्पादक संगठन, किसान हितार्थ समूह एवं खाद्य सुरक्षा समूह का गठन किया है। अब तक 176 किसान समूह का गठन हो चुका है। समूह की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने उक्त जानकारी दी। वह बामेती सभागार में मधुमक्खीपालन विषय पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के किसानों को आय में वृद्धि के लिए खेती के साथ मधुमक्खीपालन एवं मशरूम उत्पादन को भी अपनाना चाहिए। इससे रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे, वहीं ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। शहद, मशरूम एवं जैविक सब्जी उत्पादकों को संगठित कर एक प्लेटफाॅर्म पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे इन उत्पादकों को बेहतर बाजार एवं मूल्य मिल सकेगा।
मधुमक्खीपालन ऐसा व्यवसाय है, जिसे अपनाकर समाज को हर वर्ग लाभान्वित हो सकता है। मधुमक्खियों को उनकी आदतों के अनुकूल कृत्रिम घर में पालकर उनकी संख्या में वृद्धि करते हुए शहद एवं मोम की प्राप्ति की जा सकती है। मधुमक्खियों से फूलों में परागण की क्रिया भी होती है, जिससे फसल की उपज में लगभग एक चौथाई अतिरिक्त वृद्धि की जा सकती है।
यह व्यवसाय भूमिहीन एवं बेरोजगारों की आय का एक प्रमुख साधन बन गया है। मधुमक्खियों को आसानी से लकड़ी के बक्सों में पाला जा सकता है। शहद में 75 प्रतिशत शर्करा होने के कारण इसका स्वाद मीठा होता है। इसमें प्रोटीन, वसा एवं विटामिन के साथ कई पोषक तत्त्व पाये जाते हैं।
औषधीय गुण के कारण इसका उपयोग कई दवाओं के निर्माण में भी किया जाता है। यह आंख की रोशनी बढ़ाने, वात एवं कफ को नियंत्रित करने, रक्त एवं पित्त को सामान्य रखने, शरीर में विषाक्तता को कम करने, निमोनिया, खांसी, डायरिया एवं दमा आदि रोगों में बहुत ही उपयोगी है।
कार्यक्रम में नाबार्ड के सीजीएम अमिताभ लाल, एजीएम सावन प्रकाश, बामेती के निदेशक डाॅ जीतेंद्र प्रसाद, विभागीय पदाधिकारी, कृषि वैज्ञानिक एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।