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भू-जल संरक्षण विधेयक लायेगी सरकार 

पटना। जमीन के नीचे पानी के दोहन को नियंत्रित करने के लिए बिहार सरकार भू जल संरक्षण विधेयक लायेगी। भू जल स्तर में लगातार आ रही कमी और पेयजल संकट को देखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है। इस साल मार्च तक 29 हजार करोड़ राशि से सभी घरों में नल का पानी भी उपलब्ध करा दिया जायेगा। उक्त जानकारी डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने दी। वे इंडियन वाटर वर्क्स एसोसिएशन (आईडब्ल्यूडब्ल्यूए) के 52वें वार्षिक सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित कर रह थे। तीन दिवसीय सम्मेलन का आयोजन एनआईटी पटना में किया गया था। 

डिप्टी सीएम ने कहा कि पानी की प्रचूरता वाले राज्य बिहार में भी भू-जल संकट गहराता जा रहा है। पिछले साल गर्मी में पहली बार दरभंगा, छपरा एवं वैशाली जिलों में टैंकर से पानी पहुंचाना पड़ा था। भू-जल स्तर नीचे गिरने से बड़ी संख्या में चापाकल ठप पड़ गये थे। राज्य के 37 जिलों में आर्सेनिक, फ्लोराइड और आयरन की समस्या है। उन्होंने कहा कि पानी के पुनः उपयोग की सस्ती तकनीक विकसित करने की जरूरत है। जल स्तर को रिचार्ज और वर्षा जल संचय करके ही पानी के संकट का सामना किया जा सकता है। 

पूर्व के नीति निर्धारकों की गलतियों के कारण देश में पानी का अनियंत्रित दोहन हुआ है। पंजाब में धान और कर्नाटक में गन्ना की खेती को प्रोत्साहित करने का ही नतीजा है कि वहां भू-जल स्तर तेजी से नीचे गिरा है। मुफ्त बिजली से किसानों ने पानी का अनियंत्रित दोहन किया। इसका नतीजा है कि आज पंजाब में भू-जल स्तर 600 से 700 फीट नीचे चला गया है। देश के कई बड़े शहरों में गंभीर जल संकट है।

आईडब्ल्यूडब्ल्यूए के अध्यक्ष डाॅ डीपी सिंह, महासचिव कोमल प्रसाद, संयोजक डाॅ एनएस मौर्य, एनआईटी के निदेशक पीके जैन ने भी अपने विचारों को रखा।  
 


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