पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए कानून बने हैं, लेकिन सबसे बड़ी जरूरत लोगों को जागरूक करने की है। लोगों के जागरूक होने से कानून का सही तरीके से पालन हो पाता है। बिहार सरकार पर्यावरण के अनुकूल विकास की योजना बनाते हुए काम कर रही है। मुख्यमंत्री केंद्रीय एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के दो दिवसीय सम्मेलन (16-17 जनवरी) के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
सम्मेलन का आयोजन बिहार म्यूजियम सभागार में किया गया है। बिहार में इससे पहले 1992 में इस सम्मेलन का आयोजन किया गया था। दो दिवसीय इस सम्मेलन में प्रदूषण की स्थिति, पर्यावरण संकट और समाधान पर चर्चा होगी।
सीएम ने कहा कि राज्य के तीन शहरों को प्रदूषण के लिए चिन्हित किया गया है। वाहन प्रदूषण की रोकथाम के लिए पंद्रह वर्ष पुराने डीजल वाहनों के परिचालन को बंद करने का निर्णय लिया गया है। इलेक्ट्रिक वाहन के प्रयोग से वायु प्रदूषण में कमी आयेगी।
राज्य के बंटवारे के बाद बिहार का हरित आवरण नौ प्रतिशत था। हरियाली मिशन की शुरुआत कर 19 करोड़ पौधे लगाये गये। आज राज्य का हरित आवरण क्षेत्र 15 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसे आगे बढ़ाने के लिए काम हो रहा है। जल-जीवन-हरियाली अभियान पर अगले तीन वर्षों में 24 हजार 524 करोड़ राशि खर्च की जायेगी।
ठोस अवशिष्ट प्रबंधन की दिशा में भी काम हो रहा है। नालंदा जिले के राजगीर प्रखंड की भूई ग्राम पंचायत में जीविका समूह ने इसका बेहतर प्रबंधन किया है। ईंट-भट्ठे के प्रयोग को राज्य में नियंत्रित करने के लिए कड़े नियम बनाये गये हैं। अब यहां के सरकारी भवनों के निर्माण में फ्लाई एस ब्रिक्स का प्रयोग हो रहा है। इसके लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है।
सम्मेलन को डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी, केंद्रीय पर्यावरण सचिव सीके मिश्रा, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अध्यक्ष एसपी सिंह परिहार, प्रधान सचिव दीपक कुमार सिंह एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अध्यक्ष अशोक कुमार घोष ने भी संबोधित किया।