पटना । सब्जी (तरकारी) उत्पादन में बिहार देश में तीसरे स्थान पर है। पहले स्थान पर लाने के लिए कृषि विभाग प्रयासरत है। बिहार की मिट्टी एवं जलवायु सब्जी उत्पादन के लिए उपयुक्त है। पहले एवं दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश एवं पश्चिम बंगाल हैं। कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने तरकारी महोत्सव 2020 के उद्घाटन के मौके पर उक्त जानकारी दी। तीन दिवसीय तरकारी महोत्सव (17-19 जनवरी) का आयोजन ज्ञान भवन में किया गया है।
तरकारी महोत्सव के आयोजन का मुख्य उद्देश्य सब्जियों के उत्कृष्ट उत्पादन में स्वच्छ प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने के साथ गुणवत्तायुक्त उत्पादन को प्रोत्साहित करना है। किसानों का ज्ञानवर्धन भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु के वैज्ञानिक डाॅ एम. पिचाई मुत्थू एवं बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के वैज्ञानिक करेंगे। बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने उत्कृष्ट सब्जी एवं बीज के साथ इस महोत्सव में शिरकत की है।
सब्जी के क्रेता-विक्रेता समागम कार्यक्रम से बिहार के उत्पाद को अन्य प्रदेशों के बाजार से संबद्ध एवं निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। महोत्सव में किसानों की प्रदर्शित सब्जी एवं रंगोली कला का मूल्यांकन वैज्ञानिकों की कमिटी करेगी। प्रत्येक वर्ग की प्रत्येक शाखा में तीन उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसान एवं कलाकार पुरस्कृत किये जायेंगे। चयनित प्रतिभागियों को पहले, दूसरे एवं तीसरे पुरस्कार के रूप में क्रमशः पांच हजार , चार हजार एवं तीन हजार रुपये दिये जायेंगे। एक सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागी को दस हजार रुपये का विशिष्ट पुरस्कार मिलेगा।

डाॅ प्रेम ने कहा कि बिहार में सब्जी क्षेत्र में सफलता के कहानी रचने वाले किसानों पर आधारित डाॅक्यूमेंट्री फिल्म भी तैयार की गयी है। महोत्सव में विभिन्न जिलों से किसानों की सहभागिता के लिए ऑनलाईन पंजीकरण की व्यवस्था की गयी है।
कृषि सचिव डाॅ एन सरवण कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय बागवानी एवं मुख्यमंत्री बागवानी मिशन के सफल कार्यान्वयन से सब्जी के क्षेत्र विस्तार तथा उत्पादन में वृद्धि हुई है। जैविक सब्जी के प्रोत्साहन के लिए कृषि विभाग कई कार्यक्रम क्रियान्वित कर रहा है। कृषि निदेशक आदेश तितरमारे ने सब्जी किसानों को सब्जी पर आधारित कविता सुना कर उन्हें प्रोत्साहित किया। कृषि विभाग के विशेष सचिव रवींद्र नाथ राय, उद्यान निदेशक नंद किशोर समेत कृषि वैज्ञानिक, पदाधिकारी एवं किसान इस अवसर पर उपस्थित थे।