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लकड़ी उद्योग के लिए विधेयक लायेगी सरकार 

पटना। डिप्टी सीएम सह वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि काष्ठ (लकड़ी) आधारित उद्योगों को विनियमित करने के लिए सरकार नया विधेयक ला रही है। विधयेक विधान मंडल के आगामी सत्र में लाया जायेगा। अन्य उद्योगों की तरह काष्ठ उद्योग स्थापित करने वालों को भी रियायत देने पर विचार किया जा रहा है। 2020-21 की बजट पूर्व परिचर्चा के बाद डिप्टी सीएम ने यह जानकारी दी। पहली बैठक वन, वानिकी एवं पर्यावरण प्रक्षेत्र से संबंधित थी। 

परिचर्चा में काष्ठ आधारित उद्योग, नर्सरी, कृषि वानिकी, ईको टूरिज्म, पर्यावरण, जैव विविधता, वन्यजीव संरक्षण एवं स्वयं सेवी संस्थाओं से जुड़े 50 प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव दिये। प्रधान सचिव एस.सिद्धार्थ एवं दीपक कुमार सिंह समेत कई अधिकारी उपस्थित थे।

डिप्टी सीएम ने कहा कि 2005-06 में वन विभाग का बजट जहां मात्र 50 करोड़ था, वहीं 2019-20 में 911 करोड़ हो गया है। जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत अगले तीन साल में वन विभाग की ओर से 2,756 करोड़ खर्च किये जायेंगे। 7.70 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य है।

कृषि वानिकी के तहत 2012-18 के बीच बिहार में पोपुलर व अन्य प्रजातियों के 8.46 करोड़ पौधे लगाये गये हैं। पोपुलर के परिपक्व पेड़ों को खरीद कर दूसरे राज्यों में ले जाने वालों को सरकार आवश्यक सहूलियत देगी। बिहार में जैव विविधता बोर्ड के साथ विगत साल 27 दिसंबर को 5 हजार से ज्यादों पंचायतों में प्रबंधन समिति गठित की गयी है। 

जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत इस साल पृथ्वी दिवस (9 अगस्त) के दिन 2.51 करोड़ पौधारोपण किया जायेगा। नर्सरी संचालक एवं किसानों को पौधारोपण का प्रशिक्षण देने, स्थानीय निजी नर्सरी से पौधों की खरीद एवं बांस की खेती को बढ़ावा देने के सुझाव पर सरकार विचार करेगी। कृषि वानिकी के तहत किसानों को पौधे मुफ्त में नहीं बल्कि 10 रुपया प्रति पौधा सुरक्षा निधि लेकर दिया जायेगा। तीन साल बाद सुरक्षा निधि के अतिरिक्त पौधे की जीविता के आधार पर उन्हें 60 रुपये दिए जायेंगे।
 


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